गुरुवार, अगस्त 28, 2008

नशा छोड़ो

नशा नाश कारण बना , करो नशे का नाश ।
एक बार चूके अगर, समझो आत्म-विनाश ॥
समझो आत्म-विनाश , नशे का पीछा छोड़ो ।
भाँग , शराब और गुटखे से , नाता तोड़ो ॥
हुक्का , बीड़ी , तम्बाकू को दूर भगाओ ।
जागो ख़ुद भी और सभी को आप जगाओ ॥

3 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा संदेश है
    बधाई
    कृपया पधारे manoria.blogspot.com and knjiswami.blog.co.in

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  2. बेहतर प्रयास के लिये शुभकामनाएं....
    निरन्तरता सदैव निखारती है...
    बधाई..

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  3. 'लुत्फ़-ए-मय तुझसे क्या कहूं ज़ाहिद
    हाय कम्बख़्त तू ने पी ही नहीं'
    (अन्यथा न लें। यूं ही मज़ाक में कह रहा हूं।)

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