मंगलवार, १० नवम्बर २००९

मर्दों वाला काम

abu_azmi

अबू आज़मी ने किया, मर्दों वाला काम ।

कम से कम इस बात पै, मेरा उन्हें सलाम ॥

मेरा उन्हें सलाम, झुके बाकी सब योद्धा ।

तुम ही साहूकार, और सब तो घसखोदा ॥

विवेक सिंह यों कहें, बधाई हुई लाजमी ।

मर्दों वाला काम कर दिये अबू आजमी ॥

18 प्रतिक्रियाएँ:

Nirmla Kapila ने कहा…

वह वaाh ह्क्या बात है सुन्दर सटीक शुभकामनायें

इष्ट देव सांकृत्यायन ने कहा…

लाल सलाम!!!

रवि सिंह ने कहा…

सही है
ईश्वर करे आपको सारे नेता अबू आजमी जैसे ही मिलें

आभा ने कहा…

अबू आजमी ने मर्दो वाला काम किया सही है .,आप को इस पद्द के लिए बधाई लाजमी है

श्यामल सुमन ने कहा…

अबू आजमी ने दिया मनसे को संदेश।
मन से हिन्दी प्रेम कर नहीं तो होगा क्लेश।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

रंजन ने कहा…

बड़े दिनों बाद दिखे महाराज..

वैसे हंगामा खड़ा करना इनका मकसद है..
हिंदी तो एक औजार है..

न उन्हे मराठी से कोई मतलब और न इन्हें हिन्दी से..

kshama ने कहा…

Rachana saaf saral hai...vidambana ye ki, in logonki aankhen kab khulengee?

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi ने कहा…

जय हो!

फ़िरदौस ख़ान ने कहा…

bahoot khoob...

cmpershad ने कहा…

वाह जनाब! एक छक्का लगाया और खिसक गए... इतने दिनों बाद:)

राज भाटिय़ा ने कहा…

हम सब चोर है..... हिन्दी तो एक बहाना है जी

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा…

बधाई आप भी स्वीकारें.

जी.के. अवधिया ने कहा…

कुण्डलिया में आपने की है सीधी बात।
हिन्दी निंदा जो करी उसको मारी लात॥

संजय बेंगाणी ने कहा…

ये गुण्डे है हिन्दी सेवक जाली

फिर किस बात पर बजाएं हम ताली?

भैया, आजमी के बाद दो और विधायको ने भी हिन्दी में शपथ ली थी. एक ने संस्कृत में ली. उनका विरोध नहीं हुआ!

हिन्दी- मराठी बहाना है, आपसी लड़ाई है. हिन्दी के लिए आजमी मर्द है तो मराठी के लिए राज क्यों नहीं? मत भूलो कि हिन्दी और मराठी दोनो हमारी ही भाषाएं है.

विवेक सिंह ने कहा…

@ संजय बेंगाणी जी,

सवाल हिन्दी या मराठी का कतई नहीं है, सवाल है कि क्या किसी को भी अपनी पसंद की भाषा में शपथ न लेने की धमकी दी जानी चाहिए ? और क्या ऐसी धमकी का जवाब अधिकतर का मौन होना चाहिए ?

हमारी नज़र में तो जो हिन्दी में ही शपथ लेने को दवाब डाले वह भी उतना ही दोषी है ।

पर किसी के गैरजरूरी दवाब में न झुकने वाला तो मर्द ही हुआ । हम चाहे आज़मी जी की अन्य बातों से सहमत न हों , पर इस बात पर तो तारीफ ही निकलती है ।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने कहा…

बिल्कुल सही सोच है आपकी। भाषा को संवाद का माध्यम ही रहने दें, लड़ाई का नहीं। देवी सरस्वती इससे रूठ जाएंगी।

शिवम् मिश्रा ने कहा…

क्या कहने ....बहुत खूब !!

Chinmay ने कहा…

आज़मी को थप्पड़ पड़ना हिन्दी का अपमान नही है. आज़मी को यह सज़ा बहुत पहले मिलनी चाहिए थी , जिसके बाप ने कभी हिन्दी नहीं बोली जो खुद शपथ उर्दू में लेता हो वह क्या खाक हिन्दी का समर्थन करेगा?
खुद मुंबई के पुलिस कोमिशनर ने उच्च न्यायालय में अफिडेविट दे कर कहा है कि अबू आज़मी के संबंध दाऊद इब्राहिम से हैं. खुद अबू आज़मी का फुटेज मीडीया वाले ब्रॉडकेस्ट करे हैं अबू आज़मी स्वयं भी मानते हैं की वह दाऊद के यहाँ शादी में शामिल हुए. मुंबई पुलिस इससे पूर्व भी अबू आज़मी को दंगे भड़काने के आरोप में पकड़ चुके हैं.

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