अबू आज़मी ने किया, मर्दों वाला काम ।
कम से कम इस बात पै, मेरा उन्हें सलाम ॥
मेरा उन्हें सलाम, झुके बाकी सब योद्धा ।
तुम ही साहूकार, और सब तो घसखोदा ॥
विवेक सिंह यों कहें, बधाई हुई लाजमी ।
मर्दों वाला काम कर दिये अबू आजमी ॥
इस ब्लॉग पर लिखी बातों का मेरी विचारधारा से मेल खाना आवश्यक नहीं है,यहाँ लिखी बातें विभिन्न दृष्टिकोणों से सोचने का परिणाम हैं . अत: किसी प्रकार का पूर्वाग्रह न रखें !- विवेक सिंह
अबू आज़मी ने किया, मर्दों वाला काम ।
कम से कम इस बात पै, मेरा उन्हें सलाम ॥
मेरा उन्हें सलाम, झुके बाकी सब योद्धा ।
तुम ही साहूकार, और सब तो घसखोदा ॥
विवेक सिंह यों कहें, बधाई हुई लाजमी ।
मर्दों वाला काम कर दिये अबू आजमी ॥
18 प्रतिक्रियाएँ:
वह वaाh ह्क्या बात है सुन्दर सटीक शुभकामनायें
लाल सलाम!!!
सही है
ईश्वर करे आपको सारे नेता अबू आजमी जैसे ही मिलें
अबू आजमी ने मर्दो वाला काम किया सही है .,आप को इस पद्द के लिए बधाई लाजमी है
अबू आजमी ने दिया मनसे को संदेश।
मन से हिन्दी प्रेम कर नहीं तो होगा क्लेश।।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
बड़े दिनों बाद दिखे महाराज..
वैसे हंगामा खड़ा करना इनका मकसद है..
हिंदी तो एक औजार है..
न उन्हे मराठी से कोई मतलब और न इन्हें हिन्दी से..
Rachana saaf saral hai...vidambana ye ki, in logonki aankhen kab khulengee?
जय हो!
bahoot khoob...
वाह जनाब! एक छक्का लगाया और खिसक गए... इतने दिनों बाद:)
हम सब चोर है..... हिन्दी तो एक बहाना है जी
बधाई आप भी स्वीकारें.
कुण्डलिया में आपने की है सीधी बात।
हिन्दी निंदा जो करी उसको मारी लात॥
ये गुण्डे है हिन्दी सेवक जाली
फिर किस बात पर बजाएं हम ताली?
भैया, आजमी के बाद दो और विधायको ने भी हिन्दी में शपथ ली थी. एक ने संस्कृत में ली. उनका विरोध नहीं हुआ!
हिन्दी- मराठी बहाना है, आपसी लड़ाई है. हिन्दी के लिए आजमी मर्द है तो मराठी के लिए राज क्यों नहीं? मत भूलो कि हिन्दी और मराठी दोनो हमारी ही भाषाएं है.
@ संजय बेंगाणी जी,
सवाल हिन्दी या मराठी का कतई नहीं है, सवाल है कि क्या किसी को भी अपनी पसंद की भाषा में शपथ न लेने की धमकी दी जानी चाहिए ? और क्या ऐसी धमकी का जवाब अधिकतर का मौन होना चाहिए ?
हमारी नज़र में तो जो हिन्दी में ही शपथ लेने को दवाब डाले वह भी उतना ही दोषी है ।
पर किसी के गैरजरूरी दवाब में न झुकने वाला तो मर्द ही हुआ । हम चाहे आज़मी जी की अन्य बातों से सहमत न हों , पर इस बात पर तो तारीफ ही निकलती है ।
बिल्कुल सही सोच है आपकी। भाषा को संवाद का माध्यम ही रहने दें, लड़ाई का नहीं। देवी सरस्वती इससे रूठ जाएंगी।
क्या कहने ....बहुत खूब !!
आज़मी को थप्पड़ पड़ना हिन्दी का अपमान नही है. आज़मी को यह सज़ा बहुत पहले मिलनी चाहिए थी , जिसके बाप ने कभी हिन्दी नहीं बोली जो खुद शपथ उर्दू में लेता हो वह क्या खाक हिन्दी का समर्थन करेगा?
खुद मुंबई के पुलिस कोमिशनर ने उच्च न्यायालय में अफिडेविट दे कर कहा है कि अबू आज़मी के संबंध दाऊद इब्राहिम से हैं. खुद अबू आज़मी का फुटेज मीडीया वाले ब्रॉडकेस्ट करे हैं अबू आज़मी स्वयं भी मानते हैं की वह दाऊद के यहाँ शादी में शामिल हुए. मुंबई पुलिस इससे पूर्व भी अबू आज़मी को दंगे भड़काने के आरोप में पकड़ चुके हैं.
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