गुरुवार, दिसंबर 25, 2008

फुरसतिया का ऐजेण्डा

जब से ब्लॉगिंग का शौक चढा है । हम जब भी घर से बाहर होते हैं तो फुरसत के समय अक्सर मोबाइल पर पुराने ब्लॉग्स पढते रहते हैं । इसी श्रंखला में कल जब फुरसतिया का ब्लॉग पढ रहे थे तो उनके जन्मदिन के बहाने लिखी पोस्ट में उनका ऐजेण्डा पढा . आप भी देखिए :
ब्लागजगत से संबंधित तमाम काम करने को बकाया हैं। उनकी लिस्ट क्या बनायें
लेकिन जो कुछेक जरूरी काम लगते हैं उनमें ये करने का मन है:-
1-ब्लाग लिखना बंद करने की घोषणा ।
2-सबके प्यार और अनुरोध पर वापस आने की घोषणा।
3-किसी का दिल दुखाने वाली पोस्ट न लिखना।
4- बड़े-बुजुर्गों (ज्ञानजी, समीरलाल,शास्त्रीजी आदि-इत्यादि) से अतिशय मौज लेने से परहेज करना।
5- नारी ब्लागरों की पोस्टों को खिलन्दड़े अन्दाज से देखने से परहेज करना।
6- नये ब्लागरों का केवल उत्साह बढ़ाना, उनसे मौज लेने से परहेज करना।
7-किसी आरोप का मुंह तोड़ जबाब देने से बचना।
8- अपने आपको ब्लाग जगत का अनुभवी/तीसमारखां ब्लागर बताने वाली पोस्टें लिखने से परहेज करना।
9- अपने लेखन से लोगों को चमत्कृत कर देने की मासूम भावना से मुक्ति का
प्रयास ।
10- तमाम नई-नई चीजें सीखना और उन पर अमल करना।
11- जिम्मेदारी के साथ अपने तमाम कर्तव्य निबाहना।
ये सारे काम आपको पता हो या न पता हो लेकिन हमें पता है कि बहुत कठिन काम हैं। लेकिन एजेंडा बनाने में क्या जाता है। कुछ जाता है क्या?
आपै बताओ!
जब से हमने यह पोस्ट पढी है । तब से हमारी अंतरात्मा हमें धिक्कार रही है कि तुम तो इनमें से कितने पाप कर चुके हो , और करने का विचार मन में पाले हो । विशेष रूप से सात नम्बर का । हालाँकि अनूप जी ने हल्का करने के लिए पहले दो सूत्र जोडे हैं और यहाँ पर हमारे लिए प्रासंगिग नहीं हैं । किंतु बाकी के सब तो हमारे लिए ही लिखे गए लगते हैं । इस आत्म-ग्लानि को दूर करने का एक ही उपाय नज़र आता है कि हम प्रायश्चित कर लें । हम गढे मुर्दों को न उखाडते हुए उन सभी लोगों से सार्वजनिक रूप से माफी चाहते हैं जो कभी हमारे व्यवहार से आहत हुए हों ,और भविष्य में दो से ग्यारह वाले ऐजेण्डे के सूत्रों को यथा सम्भव पालन करने का प्रयास करने का आश्वासन देते हैं ।

13 टिप्‍पणियां:

  1. अरे भाई विवेक,
    क्या यार माफ़ी शाफी मांग रहे हो, जो हो गया सो हो गया. आगे से ध्यान रखना.

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  2. मोज़ करो भाई, बड़ा दिन मनाओ, नये साल की तैयारी करो !! शुभकामनाऐं

    रंजन

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  3. मौज है तो ब्‍लॉग है, ब्‍लॉग है तो मौज है।

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  4. अरे नही विवेकजी, अपने आप को धिकारिए मत क्योकि आप तो जानते ही है कि रेज़ोल्यूशन्स आर मेड टु ब्रेक। तो शुक्लाजी भी शायद इन वादों को अभी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। हां, जब वे ब्लाग लिखना छोडेंगे, तब हम सोंचेंगे:)

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  5. बहुत सारा ज्ञान मिल गया आज तो ! वाया विवेक जी फ़ुरसतिया जी की जय !

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  6. प्यारे विवेक भाई,
    आपका यह निर्णय, आपकी सर्वप्रियता की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम साबित होगा. हमारे प्रिय तो आप हैं ही, और हमेशा ही रहेंगे.

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  7. भैय्या जी
    और भी तो कुछेक काम भी वो सोई जोड़ लो . ब्लॉग पढ़ने और न पढ़ने वालो की सूची भी तो बनाना है जी

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  8. वास्तव मेँ अनूप शुक्ल बहुत शानदार इंसान हैं।

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  9. सुबह का भूला अगर शाम को बापिस आ जाए तो भूला नही कहलाता .

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  10. भई हम तो यह कहेंगे कि blogger, wordpress, tumblr, publr, soup.io, live journal, या फिर कोई और पन्ना' इस पर अपने मनोभाव उतारना अच्छा है या किसी और का लिखा पढ़ना और उस पर टिप्पणी करना अच्छी बात है। किन्तु किसी को अनुभवी/बड़ा या किसी को तुच्छ/नादाँ समझना दोनों बातें ग़लत हैं, क्योंकि उपरोक्त सेवाएँ मुफ़्त हैं जिसके मन में जो आये और जो उचित हो लिख सकता है, किसी की टिप्पणियों या ब्लॉगिग के वर्षों की संख्या यह नहीं बताती कि वह महान है जैसा मैंने प्राय: देखा है लोग इसे किसी Social Network की तरह treat करते हैं। चार अपने मित्र बनाये और लगे अगले किसी मित्र समूह पर उल्टी-पुल्टी टिप्पणी लिखने कोई गद्य पंसद करता है तो कोई पद्य, कोई सामाजिक लेख पढ़ता है तो कोई तकनीकि... सबकी अपनी-2 रूचि है, फिर भी कुछ लोग दूसरों को टोकते हैं। कुछ तो बस अपने मित्र समूह के किसी सदस्य जिसे पहले ब्लॉग से जुड़ा किसी अमान्य संस्था से पुस्कार मिल चुका हो, उसके गुणगान गाते नहीं फिरते, बस गुरु जी, गुरु जी और सबसे यही कहलवाने की कोशिश में रहते हैं, अन्त में यही कहूँगा इसे अन्यथा न लें, जो अनुभव रहा वही इस पन्ने पर ज़ाहिर कर रहा हूँ। एक ही बात कहूँगा अपना देखें दूसरों के फटे में टाँग न अड़ायें। मेरा बस इतना ही कहना है। आप अच्छे तो जग अच्छा।

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  11. थोडा देर से आया ....लिस्ट .इसे भी जोड़ कर पढ़ें -
    ब्लॉग तो सभीका पढने का यत्न करेंगे मगर टिप्पणी मन की मौज ही बनी रहेगी ! करी करी या ना करी !

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  12. असली एजेंडा है कोई एजेंडा नही बनायो.....खुल के लिखो .दिल से लिखो.......बस नीली लाइन से मत लिखो....

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  13. यथासम्भव पालन करने की कोशिश का आश्वासन तो आपने दे ही दिया है .
    अब आपके हाथ में तो कोशिश ही है .बाकी तो जिसकी किस्मत में होगा , वो होगा ही :)

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