गुरुवार, जुलाई 02, 2009

देवी तेरी महिमा अपार

मैं होश सँभाला हूँ जब से ।
तुझको महसूस किया तब से ॥
तू मेरे साथ रही हरदम ।
खुशियाँ हों या घेरे हों गम ॥
मैं होता हूँ जब महफ़िल में ।
तू रहती है मेरे दिल में ॥
जब कभी अकेला होता हूँ ।
तेरे सपनों में खोता हूँ ॥
तू चुपके से आ जाती है ।
बस मुझे उठा ले जाती है ॥
पहुँचा देती है स्वप्नलोक ।
सपने देखूँ बेरोक-टोक ॥
मैं जो चाहूँ कर सकता हूँ ।
आश्चर्य ! न बिल्कुल थकता हूँ ॥
यह अखिल विश्व तारामण्डल ।
हो चन्द्र या कि हो सूर्य धवल ॥
मैं पहुँच गया सबसे ऊपर ।
पल में फ़िर आ धमका भू पर ॥
जीवन धरती से दूर जहाँ ।
मैं अन्तरिक्ष में गया वहाँ ॥
अनगिनत सभ्यताएं पलतीं ।
तेरे ही साँचों में धलतीं ॥
तू मन है तू ही है विचार ।
देवी तेरी महिमा अपार ॥
तुझमें ही बसते हैं ईश्वर ।
तू ब्रह्मा, तू विष्णु, तू हर ॥
तेरे ही कारण स्वर्ग, नर्क ।
राशियाँ मेष, वृष, कुम्भ, कर्क ॥
तू लाजवाब का है जवाब ।
बिन नींद दिखाती तु ही ख्वाब ॥
बिन तेरे मैं संबलविहीन ।
ज्यों योद्धा रण में शस्त्रहीन ॥
मैं कवि हूँ तू कल्पना, बता ।
बिन तेरे मेरी बिसात क्या ?

29 टिप्‍पणियां:

  1. भावपूर्ण प्रार्थना...बहुत सुन्दर.
    नीरज

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  2. बहुत खूब विवेक भाई...इन दिनों कलम ने रफ़्तार पकडी हुई है....

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  3. काफी धार्मिक टाईप हो गए हैं..

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  4. कलपना देवी जी की जय हो, लेकिन यह मिलती कहां है??

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  5. चिट्ठाचर्चा में शिव जी की जिज्ञासा कि कविता किस देवी के बारे में है?- मुझे भी छू रही है ।
    पर बहुत कुछ स्वाभाविक अभिव्यक्ति । आभार ।

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  6. bahut badhhiya, chhote chhote vaakyon me khoobsorat abhivyakti!

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  7. विवेक जी जवाब नहीं आपका ये अध्यात्मिक रंग बहुत सुन्दर लगा और अध्यात्मिक मन से ही सुन्दर रचना का जन होता है बहुत सुन्दर और सार्थ रचना बधाई

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  8. या देवी सर्वभूतेषु,
    'कल्पना ' रुपेण सँस्थिता
    विवेक भाई,
    आजकल ,
    देवी की कृपा
    आप पर स्पष्ट दीख रही है
    स्नेह सहित,
    - लावण्या

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  9. देवी चाहे जो हों प्रणम्य हैं, वन्दनीय हैं।
    प्रश्न पूछने से बेहतर है नत मस्तक हो जाना।

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  10. बहुत सुन्दर.. सत वचन..

    "तेरे सपनों में खोता हूँ ॥
    तू चुपके से आ जाती है ।
    बस मुझे उठा ले जाती है ॥
    पहुँचा देती है स्वप्नलोक ।?

    कंपनी की टैग लाइन.. जोरदार..

    भाई.. आज पता नहीं क्या दिक्कत थी.. ७ वीं बार कोशिश कर रहा हूँ तब टिप्पणी होगी शायद..

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  11. युरेका.. कामयाब.. कंपनी को धन्यवाद..

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  12. बहुत बहुत बहुत ही सुन्दरतम अभिव्यक्ति की आपने विवेक भाई। दिल जीत लिया यार। आपमें ग़ज़ब की कहन है भाई। मालिक आपको बुलंदगी बख़्शे।

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  13. Bade dinon baad aapke blogpe aayee hun..itnee tippaniyon ke baad kya kahun? Aur alfaaz kahan se laaoon?
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  14. "मैं कवि हूँ तू कल्पना, बता।
    बिन तेरे मेरी बिसात क्या?"
    कवि की कल्पना - अति सुन्दर!

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