रविवार, फ़रवरी 21, 2010

अन्तू ते सन्तू दी गड्डी


अब खुशियों का ना रहा, कोई पारावार ।
अपने घर जब आ गई, नई एस्टिलो कार ॥
नई एस्टिलो कार, लगे यह बड़ी सुहानी ।
इसके आने की है अपनी अलग कहानी ॥
विवेक सिंह यों कहें, हमें भी खुशी भई है ।
अन्तू ते सन्तू दी गड्डी नई - नई है ॥

18 टिप्‍पणियां:

  1. चमचमाती कार वाह सफर को जी चाहने लगा
    बधाई

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  2. गाड़ी के लिए बधाई विवेक , और उससे भी ज्यादा तुम्हारी स्प्रिट और मस्ती के लिए ! हार्दिक शुभकामनायें !

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  3. L ऐसे लगा है जैसे नवजात के माथे पर काला टीका। नजर न लगे।

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  4. बहुत सुंदर गड्डी जी , बहुत बहुत बधाई, इस का ना० तो हमारे हरियाणे का लगे शे, अब तो मोंजा ही मोजां जी

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  5. दो चार दिन पहले मुझे भी मेरे पापा ने दिल्वाई एक कार टाटा सफ़ारी ........ बधाई हो आपको इस्टीलो सच मे बहुत क्युट है और परफ़ोर्मेन्स भी बहुत अच्छा है . मुझे भी बहुत भाती है यह कार .

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  6. मुबारक हो जी, सफ़र सुहाना हो आपका और कार जी का
    चांदनी रातों में लोन्ग ड्राईव पर जावो जी इनके संग

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  7. नई गाड़ी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं.

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  8. अंतु-सन्तु कि पापा दी गड्डी..

    चलिए आप भी कार वाले हो गए.. हम अभी तक 'बे'कार हैं.. :)

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