शुक्रवार, अगस्त 28, 2009

अथ् श्री जिन्ना रहस्यम् - वे ऐसे क्यों थे ?

( Muhammad Ali Jinnah )

बहती गंगा में हाथ धोने का मुहावरा किसने नहीं सुना होगा ? न केवल सुना होगा बल्कि अधिकांश लोगों ने कभी न कभी बहती गंगा में अवश्य ही हाथ धोए भी होंगे । इसी तर्ज पर आज हम भी बहती गंगा में हाथ धोते हुए मुहम्मद अली जिन्ना के बारे में टूटे फूटे शब्दों में कुछ लिखने का निर्णय कर चुके हैं, ताकि थोड़ा सा लोकप्रियता रूपी गंगाजल हमारे पल्ले भी पड़ सके . क्या पता इस लेख से दिन पर दिन निर्जीवता की ओर बढ़ रहे इस ब्लॉग को संजीवनी मिल जाए ।

कुछ लोग कह सकते हैं कि जिन्ना पर लिखना लोकप्रियता का नहीं बदनामी का कारण हो सकता है । लोकप्रियता और बदनामी में अन्तर ही कितना है ? यह तो केवल दृष्टिकोण का भेद है । तो आइए आरम्भ करते हैं :

अथ् श्री जिन्ना रहस्यम्


अंग्रेजों के जमाने में आधुनिक गुजरात प्रान्त तत्कालीन बम्बई प्रेसीडेन्सी का ही एक भाग था । यहीं काठियावाड़ के गोंदल क्षेत्र में पनेली नामक गाँव था । इस गाँव में भाटिया जाति के राजपूत हिन्दुओं की अधिकता थी । गावों में मुसलमानों के पीर बाबाओं और सूफी संतों में हिन्दुओं की श्रद्धा हो जाना कोई बड़े आश्चर्य की बात नहीं होती । ऐसा अक्सर हो जाता है । पनेली गाँव के भाटिया लोगों के साथ भी यही हुआ । इनकी श्रद्धा किसी मुस्लिम पीर में हो गयी ।

धीरे-धीरे कालान्तर में इस समुदाय पर मुस्लिम रीति-रिवाजों का रंग चढ़ने लगा । अपने को शुद्ध हिन्दू मानने वाले ब्राह्मणों ने इनसे दूरी बनाना शुरू कर दिया । यहाँ तक कि इनके यहाँ शादी-विवाहों में भी मन्त्रोच्चारण के लिए ब्राह्मणों ने आना बन्द कर दिया । अब यह समुदाय एक कबीले की तरह हो गया और हिन्दू समाज से इसका सम्पर्क टूट गया ।

इस समुदाय के कुछ शिक्षित लोगों ने अपनी जड़ों से जुड़ने का प्रयास करते हुए, ब्राह्मणों से अपनी शुद्धि की गुजारिश की । किन्तु ब्राह्मणों ने इन्हें हिन्दू मानने से साफ इनकार कर दिया । इससे निराश होकर इस समुदाय ने मुस्लिम धर्म अपनाने का निश्चय किया और हिन्दू धर्म के प्रति इनके मन में क्रोध का भाव गहरे बैठ गया । इसी क्रोध में और मुस्लिम बनने के जोश में इन्होंने हिन्दू धर्म के सभी अवशेषों को चुन चुनकर मिटा दिया । नामकरण, विवाह आदि, सभी के मुस्लिम तरीकों को पूरी तरह अपना लिया गया ।

मुहम्मद अली जिन्ना के दादा श्री पूँजा गोकुलदास मेघ जी पनेली गाँव में ही रहे । किन्तु इनके पिता श्री जिन्नाभाई पूँजा, जो एक धनाढ्य व्यापारी थे, गाँव छोड़कर सिन्ध में जाकर बस गए थे । जिन्ना की माता का नाम श्रीमती मीठीबाई था ।

कहते हैं कि बालक पर उसके जन्म के समय के वातावरण का गहरा प्रभाव पड़ता है । जिन्ना के जन्म के समय इनके परिवार में हिन्दुओं के प्रति एक द्वेष की भावना पल रही थी । इसका प्रभाव बालक जिन्ना पर पड़ना स्वाभाविक था ।

रही बात जिन्ना के सेक्युलर होने या न होने की तो आपको बता दें कि सेक्युलर बहुत कठिन शब्द है । किसी के सेक्युलर होने से सामान्यतया धर्म निरपेक्ष होने का अर्थ निकाला जाता है । इस अर्थ में जिन्ना बेशक धर्म निरपेक्ष थे । यदि उन्हें इस्लाम धर्म के तराजू पर तौला जाता तो वे खोखले ही साबित होते ।

वे एक महत्वाकांक्षी नेता थे जिसने केवल धर्म का उपयोग भर किया ।

कट्टर हिन्दू नेता यदि जिन्ना को सेक्युलर कहते हैं तो इससे यही समझ में आता है कि यह एक लम्बी सुविचारित रणनीति का हिस्सा है । जो कई चरणों में पूरी होने वाली है ।

पहले चरण में जिन्ना को सेक्युलर साबित किया जाएगा । अभी कुछ लोग इसे जिन्ना का सम्मान समझ रहे हैं । लेकिन जो लोग जिन्ना को सेक्युलर कह रहे हैं वे इसे जिन्ना का सम्मान करना नहीं मानते ।

दूसरे चरण में यह साबित किया जाएगा कि सेक्युलर होना बुरी बात है । सेक्युलर लोगों ने ही भारत का विभाजन कराया था । कालान्तर में सेक्युलर शब्द को एक गाली की तरह उपयोग करने की योजना है । जब किसी नेता को अपनानित करना होगा तो कहा जाएगा, " चल बे ! सेक्युलर कहीं का ।"

अभी इस रणनीति के दो ही चरणों का खुलासा हम कर सकते हैं । ऊपर से ऐसे ही आदेश हैं । बाकी के चरण भी धीरे-धीरे आपकी जानकारी में आते रहेंगे ।

आजकल जिसे देखिए सेक्युलर होने का तमगा लटकाए घूम रहा है । छोटे से छोटा नेता भी सेक्युलर है । लेकिन इसके बाद देश में कुछ साहसी नेता ही स्वयं को सेक्युलर कहलाने की हिम्मत कर सकेंगे ।

जब सेक्युलर कहलाने में नेताओं को शर्म आने लगेगी तभी तो आयेगा मजा राजनीति के खेल का ।

22 टिप्‍पणियां:

  1. इतनी समझदारी वाली बातें कैसे लिख लेते हैं आप? कौन सी बीड़ी पी ब्रेक में। सुन्दर सुन्दर!

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  2. @ अनूप जी,

    उधार माँगकर शर्मिन्दा न करें

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  3. राजनीति की इतनी गहरी बात बताने के लिए आभार।
    देसी एडीटर
    खेती-बाड़ी

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  4. लेख तो धांसू तत्व से सरोबार लगा..

    अनूप जी की टिपण्णी पर विवेक भाई की टिपण्णी को दो सौ नंबर..

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  5. खेद है कि "चल बे! सेक्युलर कहीं का" कहकर हम किसी विदेशी को अपमानित नहीं कर पायेंगे क्योंकि सेक्युलर नाम की चिड़िया सिर्फ हमारे देश में ही पाई जाती है।

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  6. भाई अंदाज तो बड़ा दार्शनिक लगा. बढ़िया विचार अभिव्यक्ति .

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  7. विवेक जी बहुत ही काम की बाते पता चल रही है इस ब्लांगिग से, बहुत ध्न्यवाद, अनूप जी की टिपण्णी पर विवेक भाई की टिपण्णी हंसी के मारे पेट दर्द होने लगा..

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  8. एक बीडी का बंडल और माचिस VPP से भिजवायें उधार नहीं.

    रामराम.

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  9. यह तो बहुत पहले से रहस्य नहीं रहा है। पर आज आप ने एक बात को और रहस्य की तरह उजागर कर दिया कि जिन्ना भी गुजरात गौरव हैं।

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  10. बेहद सुन्दर रचना...........अतिसुन्दर

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  11. jinnah par likhna aur padhna donon hi fashion hain shayad...aap naya fashion lekar aaye hain.

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  12. बीडी जलाने के सौ तरीके.......किताब लिखने की योजना पर तुषारापात कर दिया विवेक जी।

    अब सोचता हूँ कि लिखूं- बीडी मांगने के सौ और मना करने के दो सौ तरीके :)

    उम्दा पोस्ट।

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  13. विवेक भाई खबरों को एक अलग अंदाज़ से लिखने का नायब तरीका | वाह भाई वाह | बहुत सुन्दर |

    सेकुलर शब्द को गलत साबित करने के लिए भविष्य का इन्तजार नहीं करना होगा | सेकुलर का अर्थ है - हिन्दू विरोध |

    कम से कम अपने देश मैं सेकुलर का जो घिनौना खेल चल रहा है उससे तो अपने सेकुलर कहने मैं शर्म आती है | भाई सांप्रदायिक कह लो पर सेकुलर वाली गाली मत दो |

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  14. तेरे बिना भी क्या जिन्ना ....वाह विवेक जी .

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  15. का विवेक बाबू....माने सब कुछ ..बीडी पीकर ही हो सकता है...चलिये हमरे लिये भी एक ठो बंडल तैयार रखिये त.....

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  16. बीड़ी भी तो नही पी सकते अपन,सांस की बिमारी का लोचा है।

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  17. "लोकप्रियता और बदनामी में अन्तर ही कितना है ? यह तो केवल दृष्टिकोण का भेद है ।"

    तभी तो हमारे एक वरिष्ठ साहित्यकार ने हनुमान को आतंकवादी कहा... जिसने रावण की लंका में आग लगा दी। भई, दृष्टिकोण का अंतर है.. चाहे कह लें- अबे ओ सेक्युलरवादी की औलाद या अबे वो लाल चश्मे वाले:)

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  18. बहुत खूब विवेक भाई. सेक्यूलर कहलाने की तमन्ना को पल मे धूल धूसरित कर दिया

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