सोमवार, जुलाई 27, 2009

जनसंख्या कब बढ़ती है

चीन में काफ़ी समय से एक परिवार एक बच्चे का नारा दिया जा रहा था . पर अब सुनने में आया है कि वहाँ जो लोग स्वयं इकलौती संतान हैं उन्हें दो बच्चे पैदा करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि देश में बूढ़ों के बढ़ते प्रतिशत पर काबू किया जा सके . और भविष्य में श्रमशक्ति की कमी न होने पाये .



चीन ने जनसंख्या वृद्धि पर नियन्त्रण किया और अब फ़िर से बढ़ाने की कोशिशें होने लगीं, और यहाँ अभी तक पहला ही टारगेट हासिल नहीं कर सके । इस पर कुछ लोगों का यह कहना है कि, " देखा ? हम पहले ही जानते थे इसीलिए कभी मन से कोशिश ही नहीं की . दूरदृष्टि भी तो कोई चीज है . अगर अब भी हम कुछ होशियारी दिखा सकें तो हमें यहीं से पलट जाना चाहिये , रेस में एक तरफ़ चीन से पहले नहीं पहुँचे तो क्या . दूसरी तरफ़ तो पहले पहुँच ही सकते हैं . "

फ़िर भी अगर जनसंख्या कम करनी ही हो तो उसके लिये एक अच्छी रणनीति की दरकार है । तभी न कुछ एक्शन लिया जा सकेगा । दरअसल पहले हमें पता लगाना होगा कि साल के किन किन महीनों में जनसंख्या सबसे ज्यादा बढ़ती है । चिन्ता न करिये हमने पता लगा लिया है । हमारे स्कोरर ने बताया है कि साल में जुलाई के महीने के नाम सबसे ज्यादा जनसंख्या बढ़ाने का रिकॉर्ड है और जनवरी रनर अप है । इनमें भी एक जुलाई और एक जनवरी के दो दिन सबसे ज्यादा क्रिटिकल हैं । हमारे सर्वेक्षण में पाया गया है कि जितने लोगों का जन्मदिन एक जुलाई को होता है उतने लोगों का साल में और किसी तारीख को नहीं होता । चाहें तो एक जुलाई को कलेण्डर से बाहर किया जा सकता है या कोई दूसरा उपाय किया जाय । यह हमारे सिलेबस से बाहर से बाहर की बात है । फ़िर भी हमारी सलाह है कि सबसे पहले तो जनसंख्या दिवस को 11 जुलाई से हटाकर 1 जुलाई कर देना चाहिये ।

वैसे इस खोज के लिये हमें कुछ पुरस्कार मिलना बनता है और आजकल पुरस्कार माँगने से ही मिलते हैं । पर हमें नहीं भी मिलेगा तो बुरा नहीं लगेगा । जैसे लालू जी को मन्त्री नहीं बनाये जाने पर बुरा नहीं लगा ।

23 टिप्‍पणियां:

  1. अरे वाह हम भी तो जुलाई में ही जन्मे हैं !

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  2. इसी लिए हमारे प्रान्त में स्कूल 1 जुलाई को खुलते हैं।

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  3. सही है.. १ जुलाई याद करने में कितना आसान है.. वैसे अब स्कुल अप्रेल मई में खुलने लगे है तो ये भी शिफ्ट हो जायेगा..

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  4. क्या बेहतरीन रिसर्च किया है आपने। एडमीशन के चक्कर में बने नकली डेट आफ बर्थ जो जो न करवाये। सटीक निशाना।

    सादर
    श्यामल सुमन
    09955373288
    www.manoramsuman.blogspot.com
    shyamalsuman@gmail.com

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  5. विवेक भाइ क्या विशलेशण है सच मे ही हम लोग जु्लाई मे रात की शिफ्ट से इसी लिये डरते थे कि बार बार डिलिवरी केस की एडमीशन के लिये उठना पडता था अगर पहले पता होता तो आपके लिये आँकडे जरूर इक्ठे कर रखते बहुत बडिया पोस्ट है मेरी ओर से पुरुस्कार स्वरूप बहुत बहुत आशीर्वाद है

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  6. हाँ इस का सब से बडिया उपाय है कि सभी पतिओं को नवम्बर दिसम्बर मे टूर पर भेज देना चाहिये तब जनसंम्ख्या मे कुछ कमी आ सकती है अरे बुरा मत माने ये अस्पताल वलों का तज़ुरबा है हा हा हा

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  7. वाह बहुत बढ़िया लिखा है आपने! सही में जुलाई महीने में ही जनसंख्या बढती है और आपने बहुत ही सुंदर व्याख्या किया है!

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  8. नसंख्या, जुलाई और नवरी! तीनों के तीनों से। क्या इतफाक है!!!

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  9. "चाहें तो एक जुलाई को कलेण्डर से बाहर किया जा सकता है" पर यह सुनिश्चित कर लें कि दूसरी जुलाई को बच्चों की आमद डबल न हो जाय:)

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  10. विवेक भाई!
    सादर नमस्कार इस महान तथ्यांवेषण के लिये.
    मैने भी एक खोज की है अर्ज किया है कि मेरी खोज के अनुसार बच्चे या तो दिन मे पैदा होते है या रात मे. अगर दिन रात को ही ----

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  11. जन संख्या कम करने का तरीका - केलेण्डर से जुलाई निकाल दो! वाह।

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  12. पहले जमाने में लोग तारीख याद नहीं रखते थे. १ जुलाई को स्कूल खुला, उससे ५ साल घटा कर तारीख १ जुलाई लिखवा देते थे, ताकि दिन न गिनना पड़ जाये.

    पुरुस्कार के लिए कुछ वजन तो रखो फाईल पर. :)

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  13. ha ha ha
    ye wakai such hai kya???
    ye aapka vishleshan hai yaa kisi survey company dwara kiya hua??
    vaise ..baat aapne bilkul sahi kahi.. :)

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  14. अच्छी जानकारी दी है आपने | इसमें व्यंग का पुट देकर इसे और भी अच्छा बना दिया |

    अब हम लोगों की कुछ सेवा कीजिये ... तभी तो पुरस्कार की सिफारिस करेंगे ?

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  15. समीर जी ने सही कहा | हमारे गांव के मास्टर जी भी बच्चो के स्कूल में नाम लिखते समय एसा ही करते थे |

    वैसे पुरस्कार न मिलने आप भले ही बुरा ना माने पर लालू जी मंत्री पद न मिलने से बहुत दुखी है |

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  16. विवेक भाई.....................? माजरा क्या है ?

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  17. लेओ अब माजरा बताओ! बड़ा बवाल है! लेकिन कर क्या सकते हो? बवालजी एक तो प्रशंसक हैं और दूसरे जबलपुरिये। :)

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