मंगलवार, अगस्त 11, 2009

आज ऐसे ही भाव आ रहे हैं

प्राय: दाँतों के बीच में भोजन-कण उदाहरणार्थ मिर्ची का बीच, अमरूद का बीज, पॉपकॉर्न का छिलका या कोई अन्य रेशा फँस जाता है । यह साधारण सी बात है । हमें यह भले ही साधारण लगे किन्तु जीभ के लिये यह बिल्कुल भी साधारण बात नहीं कि कोई बाहरी तत्व उसके क्षेत्र में रहे । अत: जब तक वह भोजन-कण निकल न जाये उसे चैन नहीं मिलता । उसका प्रयास जारी रहता है । ऐसी स्थिति में यदि भोजन-कण बुरी तरह फँसा हो तो जीभ को समझा बुझाकर शान्त बिठाना बड़ा कठिन होता है .

कभी-कभी हम जीभ को समझाने बुझाने में असफल रहते हैं तो भोजन-कण को उँगली से या किसी माचिस की तीली से निकालने का प्रयास किया जाता है । इससे काम नहीं बना तो नीम की सींक ली जाती है . नीम की सींक भले ही भोजन-कण को न निकाल पाए लेकिन मसूड़ों के बीच में इसके घर्षण से मज़ा आने लगता है . ज्यादा देर तक यह किया तो मसूड़ों से खून भी आने लगता है . ऐसा करते करते यह भ्रम हो जाता है कि खून निकलने से ही मज़ा आता है ।

कालान्तर में नीम की सींक का स्थान ऑलपिन द्वारा ले लिया जाता है । और ऐसा मज़ा लेने की लत सी पड़ जाती है । फिर चाहे भोजन-कण दाँतों में फँसे या न फँसे , अवसर मिलते ही व्यक्ति ऑलपिन से मसूड़े कुरेदने लगता है । और जाने अनजाने अपनी बत्तीसी को नुकसान पहुँचाता रहता है ।

फिर अगर किसी दिन बोध हो कि वह क्यों यूँ ही अपना नुकसान किये जा रहा है तो यह सिलसिला रुक जाता है पर मज़े की याद आते ही कुलबुलाहट शुरू हो जाती है ।

ऐसे में यदि दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर हमने दो तीन दिन कुलबुलाहट को सहन करते हुए भी बत्तीसी से छेड़छाड़ नहीं की तो सब सामान्य भी हो सकता है ।

समझदार लोग केवल भोजन-कण फँसने पर उसके निकालने तक ही सीमित रहते हैं । और अन्य लोग दाँत कुरेदने की लत पाल लेते हैं ।

आज ब्लॉगिंग करते एक साल पूरा हुआ तो मेरे मन में यही भाव आ रहे हैं ।

29 टिप्‍पणियां:

  1. किसी अच्छे काम को तब तक करना चाहिये ,जब तक कि हमे उसकी आदत पड जाए तथा किसी बुरे काम से तब तक बचना या दूर रहना चाहिए जब तक कि हमे उसकी आदत पड जाए.......पहली वर्षगांठ की बधाई....हमेशा भाव आते रहें....आप लिखते रहे...

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  2. क्या भई अब क्या दाँत भी नहीं कुरेदें??

    चलो भई नहीं करते, मगर आप हमारे ब्लाग का नाम इस तरह से बिना हमसे पुछे नहीं लिख सकते, अब आपको रॉयल्टी देनी होगी।

    बोलिये कब भिजवा रहे हैं धनादेश?? ;)

    - विजय वडनेरे
    कुलबुलाहट (http://vijaywadnere.blogspot.com)

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  3. ब्‍लागिंग के एक वर्ष पूरा होने की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं !!

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  4. एक साल पूरा होने की बधाई के साथ ही अनेक शुभकामनाऐं. एक ही साल में ऐसे दार्शनिक विचार आने लगे. दो साल में तो बोध की प्राप्ति हो जायेगी.

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  5. बहुत ही उत्तम विचार. बधाई.
    एक साल पूरा होने पर हमारी बधाई स्वीकार करें. एक साल में ही आपने लेखन का एक अद्भुत संसार बनाया है.

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  6. बहुत दार्शनिक हो गये आज तो.. बधाई पहली वर्षागांठ पर..

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  7. अब तो लगन लग ही गयी! अब क्या फायदा!

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  8. विवेक जी,
    एक साल सफलता पूर्वक पूरा करने के लिए हार्दिक बधाई..

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  9. एकवर्ष पूरे होने पर बधाई .

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  10. ब्लागिंग एक वर्षकीय पारी के लिये मुबारकबाद. इस दौरान मुझे तो लगता है कि बालिंग बैटिंग कीपरी स्कोरकीपरी अम्पायरी ----- सब कुछ कर लिया है.
    अच्छा लगा

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  11. साल पूरा होने की बधाई..एक साल की यात्रा मे ऐसा बोध होगया तो अब बुद्धत्व प्राप्ति निश्चित ही अगले साल मे हो जानी है. अग्रिम बधाई.

    रामराम.

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  12. विवेक जी ब्लोग जगत मे एक साल पुरे होने पर ढर सारी बधाई।

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  13. "कभी-कभी हम जीभ को समझाने बुझाने में असफल रहते हैं तो भोजन-कण को उँगली से या किसी माचिस की तीली से निकालने का प्रयास किया जाता है..."

    अरे भैया....टूथपिक है ना!!!

    चलो, सालगिरह की बधाई लो और मिठाई खिलाओ :)

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  14. अच्‍छे भाव आए हैं ..भलाई करनेवाले।
    ब्‍लॉगिंग की सालगिरह पर बधाई। साल भर में ही आपने ब्‍लॉगिंग में जो जगह बनाई है, मिसाल है।

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  15. ब्लागिंग की वर्षगाँठ पर बहुत बहुत बधाइयाँ। दांत कुरेदने मे कोई लफड़ा नहीं है रक्त निकलने के पहले तक।

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  16. इसी के चलते हमारी भी बत्तीसी बर्बाद हो गयी. ब्‍लॉगिंग की सालगिरह पर बधाई.

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  17. वाह वाह आज कई दिन बाद अपने रंग मे आये हैं आपका व्यंग बहुत बदिया होता है हर छोटी से छोटी बात आप बखूबी पकद लेते हैं अब भला कोई दाँत भी ना करोले हा हा ह अपकी पोस्त पढ्ते जीभ झट से दाँत से जा टकराई अब क्या करें ह ह

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  18. बधाई। शानदार सफ़र रहा। गुड टाइप का। आगे और अच्छा रहेगा।

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  19. विवेक जी जरा पोपले ब्लागरों की लत पर भी प्रकाश डाल दें,
    जिनके मुँह में दाँत नहीं है, पर.. आँत बड़ी लम्बी है ।
    ब्लाग-वार्षिकी की शुभकामनायें ।

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  20. वाह विवेक बाबु ...एक साल पूरा कर लिए ..बहुत बढिया जी..कमाल है ..बहुत बहुत बधाई ..और हाँ समीर भाई कह रहे हैं ..कौनो दर्शन टाईप भाव आ रहे हैं मन में....अरे लंबा तान के सोइए जी..बढ़िया सपना सब आयेगा..आ फिर हमें घुमाइए स्वप्नलोक...और हाँ एक ठो और बात ..ई हमरी टिप्प्न्नी का स्कोर कितना हुआ जी ...

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  21. सालगिरह की बहुत बहुत बधाई।

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  22. ब्लोगिंग की सालगिरह मुबारक...साल गिरह मनाने का आपका ये अंदाज़ बहुत पसंद आया...अनूठा..
    नीरज

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  23. ब्लॉग्गिंग की साल गिरह और आपके भावों में मैं कोई सम्बन्ध नहीं तलाश पाया . वैसे साल गिरह पर बधाई देने का चलन है इसलिए मेरी भी स्वीकारें भले ही उससे कुछ भी नहीं होता हो

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  24. विवेक जी, व्यंग्य के माध्यम से जूत्ते मारने की कला में आपको महारत हासिल है:)
    ब्लाग वर्षगाँठ की बधाई!!

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  25. ब्‍लागिंग के एक वर्ष पूरा होने की बहुत बहुत बधाई.

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  26. सही पोस्ट है भाई. अगले साल इसी दिन की पोस्ट कितनी ज़बरदस्त होगी इस का आभास देती हुई ... बधाई एक साल पूरा होने पर ....

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