सोमवार, अक्तूबर 05, 2009

धर्म के ठेकेदारो सुधर जाओ

आजकल ब्लॉग-जगत में धर्म का बोलबाला है . सभी अपने धर्म को अच्छा सिद्ध करने की कोशिश में हैं . अन्य धर्म वालों को आकर्षित करने में जुटे हैं जैसे अवैध रूप से सवारी ढोने वाले जीप जीप चालक आपस में एक एक सवारी के लिए झगड़ते रहते हैं . हमारा धर्म बड़ा लिबरल है, अमुक धर्म तो निहायत ही कट्टर है या गंदा है . वो मूर्तिपूजक है बुरा है आदि वाक्य सुनकर ऐसा ही आभास होता है जैसे ये भगवान तक पहुँचाने का कमीशन लेते हों .

हमने बचपन से ही पढ़ा है कि धर्म भगवान तक पहुँचने का एक साधन मात्र है . अलग अलग धर्म एक ही ईश्वर की आराधना अलग अलग तरीकों से करते हैं . या कहें कि धर्म एक बस के समान है जो हमें सुविधाजनक तरीके से मंजिल तक पहुँचाती है . इसके कण्डक्टर और ड्राइवर सवारियाँ लाते हैं , बस में ठूँस देते हैं . लेकिन जो सवारियाँ पहले से ही बस में हैं वे इससे खुश नहीं होती . आखिर उन्हें परेशानी होती है घिचपिच से .

अब धर्म की बस को देखिए इसके कण्डक्टर और ड्राइवर तो बस को चलती छोड़कर पहले ही भगवान के पास पहुँच गए ट्रेन पकड़कर . सवारियाँ आपस में लड़ मर रही हैं . शायद सोचती हैं कि बस जल्दी भरे तो चले . ड्राइवर पहले चला गया यह पता चले तो शायद अपने निजी वाहन का इन्तजाम करके जाएं . अन्यथा इसी बस में पड़े सड़ते रहें . ये कभी नहीं पहुँचाएगी .

समझ लो आप भगवान के पास पहुँच भी गए . वहाँ फिर वही दिक्कत . एक बस के हिसाब से सब इन्तजाम मिलेंगे . जिस बस में ज्यादा लोग होंगे उन्हें परेशानी होगी . जैसे आरक्षण की श्रेणी में गुर्जरों को डाले जाने से राजस्थान में मीणाओं को दिक्कत हो रही है . वे तो कभी नहीं कहते कि और लोग भी हमारे साथ आरक्षण में आने चाहिए . रही बात सुरक्षा की फीलिंग की . कुछ लोगों को संख्याबल अधिक होने से सुरक्षा की भावना आती है . लेकिन क्या भरोसा कि जो आदमी आपके बगल वाली सीट पर बैठा है वही आपकी जेब नहीं काट लेगा ?

इसलिए भाइयो अपने लक्ष्य पर नज़र रखो . आपको अच्छे और सुविधाजनक तरीके से अपनी मंजिल तक पहुँचना है . आप सवारी हो , सवारी रहो . ड्राइवर बनने की कोशिश मत करो . ड्राइविंग का शौक है तो अपना वाहन लो और चलते बनो .

28 टिप्‍पणियां:

  1. सुनकर ऐसा ही आभास होता है जैसे ये भगवान तक पहुँचाने का कमीशन लेते हों

    Acha vyang kiya hai vivek ji.

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  2. "समझ लो आप भगवान के पास पहुँच भी गए . वहाँ फिर वही दिक्कत . एक बस के हिसाब से सब इन्तजाम मिलेंगे . जिस बस में ज्यादा लोग होंगे उन्हें परेशानी होगी ...."


    भारत के पास तो तीन लाख देवी-देवता हैं जी, कोई दिक्कत नहीं....
    है कोई सवारी:):)

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  3. काश कि ये लोग यह सब समझ पाते इनको झगड़ने दो।

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  4. अब धर्म की बस को देखिए इसके कण्डक्टर और ड्राइवर तो बस को चलती छोड़कर पहले ही भगवान के पास पहुँच गए ट्रेन पकड़कर . सवारियाँ आपस में लड़ मर रही हैं . शायद सोचती हैं कि बस जल्दी भरे तो चले . --> बढिया व्यंग है .... सही है

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  5. बहुत सुन्दर लिखा विवेकजी. हम बस में नहीं जायेंगे. आभार.

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  6. क्या बात है लाजवाब लिखा है आपने। बहुत-बहुत बधाई

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  7. ये ब्बात है! वाह वाह विवेक भाई। दिल जीत लेने वाली पोस्ट। एक बार नहीं, हम हज़ार बार सहमत आपकी बात से। बस, कंडक्टर, ड्रायवर और सवारियों के माध्यम से बड़ी गहरी बात कह डाली, यार। बहुत ख़ूब। बहुत बहुत आभार।

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  8. वाह!वाह क्या उपमा दी है कंडक्टर और ड्राइवर की . मज़ा आ गया पोस्ट पढ कर .

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  9. आपको लगता है वो सुधर जायेंगे?

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  10. इंसान का इंसान से हो भाईचारा...
    यही पैगाम हमारा, यही पैगाम हमारा...
    जय हिंद...

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  11. सजन रे झूठ मत बोलो खुदा के पास जाना है,
    न हाथी है ना घोडा है,वंहा पएदल ही जाना है।

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  12. वाह विवेक जी! क्या खूब व्यंग्य रचा है!
    हम तो जी सिर्फ अपनी गाडी मे ही जाएंगें...अब कौन बस में धक्के खाता फिरे:)

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  13. dharam ka matlab pracheen bhashame nisardharm se juda tha, naki jaatpaat ya karamkand.. Jab mool matlab bhula baithenge to sampradayikta ke janjalon me fanste jayenge..

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  14. इस बहाने आपने बहुत बड़ी बात कह दी है , ब्लॉग को धर्मचर्चा का स्थल बनने से बचना चाहिये ।

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  15. ब्लाग पर शरद जी और क्या हो ..?
    टंकी वाले धरम की चर्चा हो
    हा हा विवेक लगे रहो भैया मज़ेदार
    लिख रए हो किन्तु इस पोष्ट से क्लीनर गुम है ?

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  16. विवेक भाई! अगर ऐसी बाते है , तो बडा ही विचारणीय प्रशन है।
    आपने कह-@ हमारा धर्म बड़ा लिबरल है, अमुक धर्म तो निहायत ही कट्टर है या गंदा है . वो मूर्तिपूजक है बुरा है।@
    ऐसा लिखने वाले चिठ्ठो का लिन्क देते तो बात मे और भी स्पष्टता होती।
    आभार

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  17. धर्म के स्वयं भू ठेकेदारों के मुंह पर जोरदार थप्पड़ ठोका है | बहुत बढ़िया व्यंग्य |

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  18. जो लोग गंदी सांप्रदायिक राजनीति कर रहे हैं उन्हें तो नरक में भी जगह नहीं मिलेगी। ब्लाग जगत में चल रहे इस कुत्सित प्रलाप के बारे में अपना विरोध दर्ज कराने के लिए धन्यवाद

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  19. अप्पडिया..!

    इसे पढ़कर तो वाकई लप्पड़ मारने का एहसास हो रहा है...

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  20. विवेक जी आज अपने मेरे दिल की बात छीन ली . जिस तरह से ब्लागिंग में धार्मिक ठेकेदार सक्रिय हो रहे है यह चिंता का विषय है . .ब्लागर्स को ऐसे ठेकेदारों की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए . बहुत सटीक इस मुद्दे पर विचार रखने के लिए आभार

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  21. waaqai mein dharm ke thekedaaron ka sudharna bahut zaroori hai........ nahi to yeh thekedaar..... amoeba bante jayenge...........

    kyun na hum hi kuch aisa karen ki in thekedaaron ke theke hi cancel ho jayen? par yahi to sochna hai ki kya kiya jaaye? shayad... yahi karna chahiye....

    1. ब्लागर्स को ऐसे ठेकेदारों की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए..
    2. ब्लॉग को धर्मचर्चा का स्थल बनने से बचना चाहिये ।
    3. इंसान का इंसान से हो भाईचारा...
    यही पैगाम हमारा, यही पैगाम हमारा...
    जय हिंद..

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  22. AAPKA NAZRIYA AAPKE LIYE SAHI HO SAKTA HAI AUR AURO KE LIYE BHI, MAI YAH BHI KAH SAKTA HU KI JO AAP LIKHATE VO MUJHE ACHCHHA NAHI LAGTA HAI TO KYA AAP BAND KARDOGE ?

    DHARM KI CHARCHA HONI CHAHIYE YA NAHI YE KISI EK VYAKTI PAR NIRBHAR NAHI HO SAKTA. AAP HINDU HO TO HUNDU DHARM KI BADAI KARO KOI BAAT NAHI AUR AAP MUSLIM HO TO ISLAM KI BADAI KARO KOI BAAT NAHI KINTU YE BAAT SAHI NAHI SARI RASMALI ISLAM ME HAI AUR HINDU DHARM VALE BHANDI HAI TO VIVAD HOGA HAI.

    HAMARA SAMVIDHAN BHI DHARM PRACHAR KI ANUMATI DETA HAI KINTU KISI DHARM KO NICHA DIKHANE KI NAHI. MAI AAPKI BAAT SE KATAI SAHMAT NAHI HU KU BLOGGING ME DHARM KI CHARCHA NA KI JAYE, CHARCHA HO TO SIMA KE ANDAR.

    BLOGGING ME SABKI APNI APNI RUCHI HAI AUR AAPNE APNE VISHAY, AB KUCH LOGO KO BLOGGERO KO LINKIT KAR GUNGAN KARNA ACHCHHA LATA HAI TO VAH KARE HAMSE ANAVASYAK LINK DEKAR GUNGAN KARNA NAHI AATA HAI.

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  23. @ MUMBAI TIGER मुम्बई टाईगर, से सहमत, पर आप मशवरा क्‍यूं दे रहे हो, तुम अगर नाम के टाईगर नहीं हो तो स्‍वयं दे देते या अन्‍जान हो,
    मैं अगर अपना प्रचार लिंक लिंक दूंगा तो सब भाग जायेंगे, अपने ब्लागों में जा‍कर सांकल लगालेंगे, जा नहीं लगायेगा उसे महाराज आकर ऐसा मशवरा देंगें जिस पर वह स्‍वयं नहीं चलते, देखो एक शायर या शायरा के ब्लाग पर उनको मैं समझा के(निम्‍न कमेंट) आया हूं, देर सवेर यहां भी मशवरा देने आयेंगे, उनसे जवाब मांगना अपने को टाइगर साबित करना,

    @ चिपलूनकर महाराज,तुम जिस बात पर खुद अमल नहीं करते दूसरों को कैसे मशवरा देसकते हो,
    कमेंटस डिलिट करने से पाठकों में किया धारणा बनती है उसे तुम जैसे बुद्धि‍ वाले समझते हैं, तुम डिलिट किया करो, तुम सांकल लगाओ इसके लगाने के किया नुक्‍सान हैं तुम जानते हो, इसी लिये तुमने हम जैसों के लिये दरवाजा खोल रखा है, दूसरों को समझाते फिरते हो पहले स्‍वयं तो इस पर चलों, फिर भी कोई डिलिट करता है तो उसके लिये इस शायर के मंच पर शे'अर अर्ज हैः
    ''कोई सुने न सुने इनक़लाब की आवाज़। पुकारने की हदों तक तो हम पुकार आए॥''
    अंत में मेरी जान पढ लो,इस्लाम पर इशारों में भी वार करोगे तो कैरानवी को भुगतोगे, सबसे अधिक तो महाराज ने भुगता है यह दुनिया जाने ह

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  24. देखिये, कितनी अच्छे पोस्ट में घटिया बहस शुरू हो गयी....,
    किरानी और मालिक में यही फर्क है |

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