शुक्रवार, सितंबर 10, 2010

ईमानदारी का प्रमाणपत्र

एक बार किसी राज्य में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया था । बात राजा के कानों तक पहुँची । राजा ने मंत्रियों से विचार विमर्श किया कि क्या कदम उठाया जाय । मंत्रियों ने सर्वसम्मति से सलाह दी कि एक आयोग बिठाया जाय जो यह पता लगाये कि भ्रष्टाचार अपनी जड़ें  कितनी गहरी जमा चुका है ? तदनुसार कदम उठाए जाएं ।

आयोग का गठन हो गया । रिपोर्ट भी आ गयी । रिपोर्ट थी कि राज्य में तीन में से दो व्यक्ति भ्रष्ट हैं और हर तीसरा व्यक्ति ईमानदार है ।  राजा को बड़ी चिन्ता हुई । उसने फिर से मंत्रियों को पूछा कि भ्रष्टाचार को कम करने के लिए क्या कदम उठाया जाय ? सलाह मिली कि चूँकि ईमानदार लोग अल्पसंख्यक हो गए हैं अत: उन्हें आरक्षण दे दिया जाय । तय हुआ कि ईमानदार लोगों को  जिला मुख्यालयों से ईमानदारी का प्रमाणपत्र लेना होगा । तभी वे आरक्षण के हकदार होंगे । राज्य भर में यह घोषणा करवा दी गयी ।

निर्धारित दिन  जिला  मुख्यालय पर बने बूथ के सामने सुबह से ही लम्बी लाइन लग गयी । प्रमाणपत्र देने वाले बाबू को पता था कि जाँच रिपोर्ट के अनुसार हर तीसरा आदमी ईमानदार है । उसने प्रमाणपत्र देना आरम्भ किया तो पहले दो व्यक्तियों को भगा दिया और तीसरे को ईमानदारी का प्रमाणपत्र थमा दिया । यही क्रम जारी रहा । जिन लोगों को भगाता वे फिर से लाइन में पीछे जाकर खड़े हो जाते । बड़ी भीड़ को बाबू ने शाम होने से पहले ही निपटा दिया । अन्त में केवल दो ही लोग बचे जिन्हें ईमान दारी का प्रमाणपत्र न मिल सका । बाबू उनसे बोला यार तुम्हें कहीं देखा है । मेरा परिचित तो भ्रष्ट नहीं हो सकता । इस तरह  उनको भी ईमानदारी का प्रमाणपत्र मिल गया । 

उस जिले को पूर्ण ईमानदार जिला होने की बधाई स्वयं राजा ने दी और उस बाबू को सबसे परिश्रमी बाबू होने का अवार्ड भी !

10 टिप्‍पणियां:

  1. नौकरशाहों के भरोसे यही हो सकता है, आखिर नौकर भी तो बादशाह का हुकुम बजा रहा था।

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  2. उन दिनों आयोग कितनी जल्दी रिपोर्ट सौंपते थे। आज देखिए,एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन।

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  3. वाह ये भी खूब रही । आज यही तो हो रहा है। बधाई आपको भी आज अच्छी पोस्ट का प्रणाम पत्र मिल गया मगर इमानदारी से दिया है।

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  4. वाह वाह क्या बात कही है विवेक जी, भ्रष्टाचारी तो वाही है जो रिपोर्ट तैयार करवा रहा है|
    बहुत ही प्राकृतिक पोस्ट है जो घटित होतो है हमारे आसपास |

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  5. bahut sunder achchi lagi kam se kam ek kahani aur mil gayee bachchon ko sunane ke liye behatreen post hai aapki

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  6. अजी इस ईमान दार राजा का नाम तो लिख देते :)

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  7. देश का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति जैसे सम्माननीय पदों पर भी अगर बेईमानी की बैशाखी के सहारे पहुंचे लोग बैठे हों तो पूरे देश की जनता के लिए यही सन्देश जाता है की बेईमानी और भ्रष्टाचार जिंदाबाद ...शर्मनाक है ऐसी अवस्था किसी भी देश और समाज के लिए ...कोई भी व्यक्ति इमानदार बनकर इस देश में पहले तो सबकुछ गवांता है उसके बाद अपनी जान ...इसलिए आज जरूरत है की हम अपने आसपास इमानदार लोगों को जांचे और परखें तथा उनकी हर-हाल में सुरक्षा व सहायता करें ...

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  8. ""ईमानदार लोग अल्पसंख्यक हो गए हैं अत: उन्हें आरक्षण दे दिया जाय""

    ha ha ha ha

    bahut hi achha laga.. hasu ya comment karu?

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