बुधवार, जुलाई 22, 2009

टूटी मेरी सगाई

पंखा एक डॉक्टर के घर

जाकर यूँ फ़रमाया ।

कर दें मेरा भी इलाज

बिजली ने मुझे सताया ॥

घूम गया मेरा दिमाग

जैसे ही बटन दबाया ।


लटका था चुपचाप हवा में,

लेकिन अब लहराया ॥

हलचल सी मच गयी, हवा के

कण कुछ समझ न पाये ।

एक दूसरे को भगदड़ में

लतियाये, धकियाये ॥

हुई शिकायत घर मेरे,
अम्मा ने डाँट लगायी ।
बोले लोग, " इसे मिर्गी है "
टूटी मेरी सगाई ॥


26 टिप्‍पणियां:

  1. Ye bhi khoob rahee..khoob kahi..wah !
    Ab seedhe ' shadee' behtar, kah do pankhe se..!

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  2. बोले लोग, " इसे मिर्गी है "
    टूटी मेरी सगाई ॥
    क्यों भाई?...........मस्त rchna..........

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  3. गजब की खुराफ़ाती सोच है। झकास!

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  4. एक दूसरे को भगदड़ में

    लतियाये, धकियाये ॥

    ऐसा तब भी होता है जी जब पंखे फ़िल्मी सितारों के इर्द-गिर्द घूमते हैं:)

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  5. कहाँ से निकालते हि विवेक भाए ऐसे ख्यालात....बेजोड़!!!

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  6. आपकी कल्पना शक्ति के घोडे कहाँ कहाँ दौड़ते हैं....पंखे पर ही कविता रच डाली और वो भी बेमिसाल...वाह....
    नीरज

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  7. बड़ी देर से खोपडी खुजा रही हूँ,पर समझ नहीं पा रही..........

    कविता तो लाजवाब है पर विवेक जी कृपया यह बताएं कि यह कविता पंखे पर लिखी है आपने,मिर्गी पर लिखी है या इससे इतर कोई और छायावादी रहस्यवादी अर्थ है इस कविता के.........

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  8. @ रंजना जी,

    आप बच्चों से कहाँ रहस्यवाद की उम्मीद लगा बैठीं ! यह तो बच्चों की कविता है जी !

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  9. आअप तो बडे मजाकिया हैं हा हा हा

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  10. पंखे को मिर्गी आते रहना चाहिये.:)

    रामराम.

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  11. इस बरस की ५ वीं की पाठय पुस्तक में रखवा दो इसे.

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  12. बच्चों की कविता में बड़ी-बड़ी बातें कह देते हैं आप

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  13. किससे करवा दी पंखे की सगाई? कही बिजली से तो नही? फ़िर तो हमेशा मिर्गी का दौरा पड़ेगा।

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  14. पंखे को जूता सुंघा देते भैय्या.सगाई नहीं टूटती. हा हा. मजेदार. आभार.

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  15. बहुत खूब --- सगाई क्यो तोड्वा दी

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  16. ओह तो इसलिए सगाई टूटी.. हमें लगा कोई गोत्र वोत्र का मामला होगा..

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