गुरुवार, अक्तूबर 08, 2009

ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ?


ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ?


मुझे न मरने में आपत्ति
मित्र तुम्हारे हाथ
ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ?

उड़ी सदा ही मुझे देखकर
जिन आँखों की नींद
मेरी कीर्ति-पताका ने जो
हृदय, दिये थे बींध
नहीं हुआ आश्यर्य, यही थी
उनसे तो उम्मीद
किन्तु तुम भी करते आघात ?
ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ?

तुम्हें शिकायत थी, तो कहते
मुझसे मेरे मीत
हम दोनों ने मिलकर गाये
सदा प्रेम के गीत
तो क्या सब था झूठ ? झूठ थी
तेरे मेरी प्रीत ?
छिपायी तुमने दिल की बात ?
ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ?

लिये तुम्हारे ही दम पर तो
मैंने इतने पंगे
मैं अवश्य षडयन्त्रकारियों
को, कर देता नंगे
लेकिन तुमको लगे हमारे
भले कार्य बेढंगे
लगा दिल पर भारी आघात
ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ?

रहा कैसियस जलता मुझसे
सिसरो को भी तोड़ा
कैस्का भी जा मिला उन्हीं में
उसने भी मुँह मोड़ा
किन्तु हृदय तो आज ही रोया
जब तुमने भी छोड़ा
याद आयी पहली मुलाकात
ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ ?

मुझे न मरने में आपत्ति
मित्र तुम्हारे हाथ
ब्रूटस ! तुम भी इनके साथ


( और सीजर निकल लिया)

25 टिप्‍पणियां:

  1. ब्रूटस तुम भी हो इनके साथ ....
    आज ब्रूटस हर जगह देखे जा सकते हैं, किसी को आपके प्यार और अच्छे दिल से कुछ लेना देना नहीं है, शायद बेवकूफ समझते होंगे , सावधान रहिये और अपने संवेदनशील दिल को बचा कर रखें !
    शुभकामनायें , कि आपको ब्रुट्स न दिखे !

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  2. भावनुवाद? ओरीजनल कविता क्या है?

    जो भी है, रचना अद्भुत है!!

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  3. "और सीजर निकल नहीं लिया."

    सीजर तो काट कर निकल लिया. ब्रूटस को बहुत ब्रूटली काटा....:-)

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  4. यह मौलिक रचना है या भावानूदित ? मौलिक है तो संवेदित हूँ और भावानूदित तो शाबाशी !

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  5. just great .. amazing work of words ..


    bahut kuch yaad aa gaya .. specially cleopetra movie.... vivek ji , padhkar aanand aa gaya .. meri badhai sweekar kare.


    regards

    vijay
    www.poemsofvijay.blogspot.com

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  6. lअगता है ये आपका भावनात्मक अनुवाद है शायद अस्ली रचना से हट कर ाच्छा लगा शुभकामनायें

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  7. ब्रूटस को बहुतही ब्रूटली निपटाया।

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  8. ये ब्रूटस यहीं कहीं ब्लागजगत में पाए जाते हैं क्या ? :)

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  9. बहुत बढिया बनी है रचना । जिन्हें ब्रूट्स और सीजर के बारे में पता न होगा उन्हें भी बराबर मजा आयेगा ।

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  10. एट टू ब्रूट.... बृटस के मारने पर यह शब्द हर ब्रूटस के लिए है जो हर देश की राजनीति में पाये जाते है और यह राजनीति तंत्र, साहित्य, सेवा...किसी भी क्षेत्र में हो सकते हैं। हर जगह, हर समय ब्रूटस से बचना चाहिए:)

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  11. ब्रूट्स निकल लिया,
    कानपुर की तरफ़ तो नहीं गया,
    किसी ने एफ़. आई. आर किया क्या ?

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  12. Aisahee hota hai..iseeliye takleef hotee hai..gai waar karen to takleef nahee hotee...unse to yahee ummeed hotee...apnon se jab peeth pe waar hota hai, tabhee takleef hotee hai,haina?

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  13. विवेक भाई, आप ने जबरदस्त ही लिख डाला है.....कुछ कुछ कालजयी रचना जैसा ही....

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  14. जुलियस सीजर का यह हिस्सा पढाने के टाइम मास्टर साहब ने बहुत मेहनत की थी उस समय .अब तक याद है और आपकी सरल भाषा ने यादे ताजा हो गई . वैसे नजदीकी ही तो बार करते है .

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  15. विवेक जी, एक बडी गंभीर जिज्ञासा उत्पन हुई है....अल्पना जी कह रही है कि उसका निवारण तो विवेक जी ही कर सकते हैं ।
    जरा देख कर बताईये.....

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  16. ati sundar bhavanuvad, lagta hai Julias Caesar, hindi me aap likhte to kahin jyada popular hoti. :)
    पढिये ये पोस्ट जो आपके अंतर्मन को उद्द्वेलित कर देगी.
    http://swarnimpal.blogspot.com/2009/10/blog-post_08.html

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  17. अच्छी लगी आपकी रचना...पुरातन पृष्ठभूमि को भी आधुनिक द्रष्टि प्रदान की है

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  18. विवेक भाई, एक लाजवाब कृति के लिये बधाई स्वीकारें...

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  19. इस माय्थॉलोजी पर यह अच्छी कविता है ।

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