बुधवार, दिसंबर 17, 2008

गुरु-शिष्य परम्परा और अफजल गुरु

एक बार परीक्षा में गुरु शिष्य परम्परा पर निबंध लिखने को कहा गया । हमने एक उत्तर पुस्तिका से एक नमूना उठाकर यहाँ पेश किया है .
" भारत में गुरु शिष्य परम्परा बहुत पुरानी है । यहाँ पर गुरुओं का आदर किया जाता है . हम भी अपने मास्साब का बहुत आदर करते हैं . गुरु शिष्य परम्परा का महत्व निम्नलिखित है .
आपने महसूस किया होगा कि जब से संसद पर हमले के आरोपी अफजल को फाँसी की सजा सुनाई गई है तभी से यदा कदा उसकी सजा को क्रियान्वित करवाने के लिए जनता के बीच से आवाजें आती रही हैं . जब कभी कहीं बम धमाका हो जाता है तो कुछ समय के लिए यह शोर तेज होता है और फिर धीरे धीरे सब कुछ सामान्य हो जाता है ।
पर इतने पर भी हमारी सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंगती । आखिर जूँ रेंगेगी कैसे . उसे रेंगने ही नहीं दिया जाता . साफ सफाई पर ध्यान ही इतना दिया जाता है , कि बेचारी जूँ पास भी फटकने नहीं पाती , रेंगना तो बहुत दूर की बात है । हमारे पूर्व गृहमंत्री की सफाई के आगे तो अच्छे से अच्छे सफाईगीर भी पानी भरते हैं .
पर सब लोग सरकार को ही दोष दिए जाएंगे । किसी ने यह नहीं सोचा कि सरकार के ऊपर तो देश की परम्पराओं को जीवित रखने की भी जिम्मेदारी है . उस जिम्मेदारी को नहीं निबाह सकी तो आने वाली पीढियों को कैसे मुँह दिखाएगी ? यह जो अफजल के नाम के पीछे जो गुरु शब्द लगा हुआ है उसने सारा खेल बिगाडा हुआ है .
आप यह तो भली भाँति जानते होंगे कि गुरु शिष्य परम्परा इस देश में युगों से चली आरही है । गुरु के एक आदेश पर शिष्य अपनी जान तक देने के लिए तैयार हो जाते थे । एकलव्य ने कैसे गुरु के एक इशारे पर अपना अँगूठा काटकर उनको गुरु दक्षिणा में दे डाला था भूल गए आप ? बस यही प्रोब्लम है पब्लिक के साथ . पब्लिक जल्दी भूल जाती है ।
इस पर भी हमारे प्रधानमंत्री के लिए तो गुरु शब्द का और भी अधिक महत्व है . वैसे इस देश में ऐसा पहली बार नहीं है कि गुरु को मृत्यु दण्ड दिया गया हो । इससे पहले भी गुरु अर्जुनदेव को और गुरु तेगबहादुर को मुगलों ने मृत्यु दण्ड दिया था . और बाद में अंग्रेजों ने शिवराम राजगुरु को भगतसिंह के साथ फाँसी पर लटका दिया था । पर इससे क्या वे सब चाहे बेशक निर्दोष थे . पर शासकों को गुरु शिष्य परम्परा का इतना खयाल नहीं था जितना आज की सरकार को है ।
आशा है हमारी सरकार गुरु शिष्य परम्परा को जीवित रखने में कोई कसर न उठा रखेगी . और अफजल गुरु यूँ ही कबाब काटते रहेंगे . हम तो खैर अपने मास्साब का सम्मान करते ही हैं .

14 टिप्‍पणियां:

  1. अरे, अफ़ज़ल को उसके असली नाम से पुकारिए - मुहम्मद अफसल | अफ़ज़ल गुरु क्यों, अगर उपाधि जोड़नी ही है, तो अफज़ल उस्ताद कहिये | गुरु शब्द को भी बदनाम किया है (मीडीया ने) | लेकिन क्या करें, इस देश की स्वतन्त्रता तो देखिये की मुहम्मद अज़हरुद्दीन को भी अपना ख़ुद का नाम जूते पर साइन नहीं कराने दिया गया | जब तक यह देश किसी मुज़रिम को भी उसके असली नाम से भी नहीं बुला पायेगा तो फाँसी क्या देगा !

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  2. भाई ट्रेक बदल बदल कर प्रहार कर रहे हो . बहुत खास मुद्दा उठाया

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  3. अग़र यह गुरु हैं, तो चेला हमारा तंत्र है..
    जो इनको गुरु की उपाधि से नवाज़ बैठे हैं !

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  4. अफजल के नाम के पीछे जो गुरु शब्द लगा हुआ है.देशद्रोही का नाम अफजल गुरु नही अफजल गु होना चाहिए ...

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  5. गुरू को ज्यादा दिन इन्तजार नहीं करना पडे़गा... सुना है गृह मंत्रालय ने कुछ कार्यवाही शुरु की है!!

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  6. बहुत सटीक सिक्सर मारा भाई ! मजा आया !

    राम राम !

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  7. बहुत बढ़िया लिखा है विवेक भाई ! शुभकामनायें !

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  8. और हम आपका सम्मान करते है गुरु।

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  9. यही कई दिन तक जेल की मौज कटेगे भाई .ओर अंतुले जैसे लोग फ़िर भी छाती ठोककर कहेगे "किस बात की सफाई "..पता नही कौन संभल रहा है इस देश को ?

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  10. ठीक कहा आपने विवेक भाई

    प्रकाश्

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