शनिवार, अगस्त 01, 2009

किस्सा कैलोरी का

बचपन के दिन भी क्या दिन थे, जोश भरा रहता था ।
कोई काम नहीं मुश्किल यूँ रोम-रोम कहता था ॥
चार बार खाना खाते थे, फ़िर भी हल्के फ़ुल्के ।
नज़र बचाकर भागे वे दिन, खूँटों से खुल खुल के ॥
तीस पारकर शुरू हो गया, किस्सा कैलोरी का ।
अब हिसाब रखना पड़ता है, एक-एक रोटी का ॥
पूड़ी और कचौड़ी तो बस, सपनों में मिलती हैं ।
जलेबियों से मुलाकात हो तो बाँछें खिलती हैं ॥
तीन किलोमीटर नित दौड़ें, खाना कम खाते हैं ।
किन्तु वजन बढ़ता जाता है, समझ नहीं पाते हैं ॥
वे-मशीन से वजन पूछने रोज पहुँच जाते हैं ।
पाकर वही जवाब टका सा, मन में झुँझलाते हैं ॥
वे-मशीन भी अपने मन में झुँझलाती तो होगी ।
कुछ पागल सा या सनकी सा, हमें समझती होगी ॥
शीत-युद्ध सा चलता रहता, मेरा भारीपन से ।
"मुझको विजय श्री का वर दें" माँग रहा भगवन से ॥

20 टिप्‍पणियां:

  1. जय हो। बचवा जय विजय करें। शानदार रचना। समीरलालजी के लिये लिखे हो लगता है बर्थडे गिफ़्ट!

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  2. हे दैया अबहियें ई चिंता -अभी खाने मौजियाने का समय है भाई !

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  3. kahi samir ji ki motape vali post ne to nahi dara diya aapko jo pahle se motape ke khilaf morchbandi karne me jut gaye hai |

    khair bhagvan aapko vijay bhav ka aashirvad de |

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  4. कहीं समीर जी की मोटापे वाली पोस्ट ने तो नहीं डरा दिया आपको ? जो पहले से ही मोटापे के खिलाफ मोर्चाबंदी करने में जुट गए है |

    खैर ! भगवान् आपको विजय भव का आशीर्वाद दे यही शुभकामनाएँ है |

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  5. अच्छी कविता और एक कटु सत्य जो आजकल खासकर शहरो में अधिक देखने को मिलता है, या यूँ कहूँ की हर कोई पीड़ित है उससे !

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  6. भाई साहब, मेरी कहानी आपको कैसे पता चली? कॉपीराइट का केस कर दूंगा, हाँ। :)

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  7. खाओ पियो, न रहो पस्त
    मौ करो और रहो मस्त:)

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  8. समीर जी और अब आप भी! चलिये आप तो अभी काबू कर ही लेंगे. चर्बी को शरीर पर चढ़ने न देंगे.

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  9. खमीर जी को छोड़ दीजिये प्रभु..

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  10. बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति बधाई ।

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  11. सही है..
    अब तो कुछ न करो तो भी वजन बढ़ जाता है...
    क्या खायें न खाये इसी में वक्त निकल जाता है..

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  12. वाह! वाह!
    शिष्यात्मक दृष्टिकोण डाला है. हम तो गुरुवात्मक दृष्टिकोण डालकर खुश हैं. इतना कुछ चिंता नहीं करते.

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  13. चालीस पार लोगों की नित्य प्रार्थना रच दी है आप ने।

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  14. बिना खाए मरने से अच्छा है खा पी कर मरना .

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  15. आप को तो इस सब की जरूरत नही लगती । अलबत्ता सही जा रहे हैं आप । कविता बढिया है ।

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