शनिवार, सितंबर 13, 2008

अमरीकन हथियार ?

ब्लैकमेल बन जाएगा, अमरीकन हथियार ।
देगा वह ईंधन नहीं, हो जाओ होशियार ।
हो जाओ होशियार, रहेंगे रिएक्टर खाली ।
गारण्टी कुछ नहीं पक रहे पुलाव ख्याली ।
विवेक सिंह यों कहें, जहाँ पर नहीं तेल है ।
अमरीकन हथियार, वहाँ पर ब्लैकमेल है ॥

4 टिप्‍पणियां:

  1. bhai aapki lekhni ya kahe keeboard roj jo comment deta hai khush kar deta hai.bhai aligarh wale is main to maahir hai hi.

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  2. भाई विवेक जी, आप बड़ी सहजता से बहुत कुछ कह जाते हैं. आपकी कवितायें ढेर सारे मुद्दों पर बड़ी बेबाक टिप्पणी करती हैं. हिन्दी ब्लागिंग को समृद्ध कर रहे हैं आप. बड़ी प्रसन्नता होती है आपकी पोस्ट पढ़कर.

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  3. बहुत ख़ूब....अच्छी रचना है...बधाई...

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