गुरुवार, जनवरी 07, 2010

ऐसे नेता और कहाँ

amar श्री अमर सिंह जी जैसे लोकप्रिय नेता किसी परिचय के मोहताज नहीं होते । वैसे तो उनके बारे में कुछ कहना सूरज को दीपक दिखाने वाली बात होगी, लेकिन दु:ख की इस घड़ी में यदि मन की बात मन में ही रह गयी तो कहीं हृदय लोडग्रस्त न हो जाये । इसीलिए अपने विचार प्रकट करना अनिवार्य हो गया है ।

पहले हमें अलीगढ़ में पैदा होने पर कोई गर्व ही न होता था । किन्तु जब से पता चला है कि श्री अमर सिंह जी भी अलीगढ़ ही में जन्म लिए थे तब से गर्व की अनुभूति होती ही जा रही है ।

अल्प समय में ही भारतीय राजनीति के आकाश में सूरज की तरह चमकने वाले श्री अमर सिंह जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी और हँसमुख व्यक्तित्व के मालिक हैं । क्रोध तो मानो उन्हें छू तक नहीं गया है । मित्रता के मामले में भी वे सभी से हमेशा अव्वल ही रहे । जो व्यक्ति उनका मित्र बन गया उसे इतना प्यार मिला कि वह अपने सगे भाई को भी भूल गया । अभिताभ बच्चन हों, अनिल अम्बानी हों या फिर मुलायम सिंह यादव हों सभी अमर सिंह जी के गहरे मित्र हैं ।

विरोधी नेताओं के साथ भी उनके रिश्ते हमेशा प्रेमपूर्ण ही रहे । सांसदो और विधायकों में उनके प्रति एक विशेष प्रकार का आसंजक बल महसूस किया जाता रहा है । अब भी जब वे कपड़े बदलते समय अपने कुर्ते को उतारते होंगे तो निश्चित ही दो चार विधायक जेब से निकलकर गिर जाते होंगे । शांतिप्रिय श्री सिंह जी विवादों को सदैव दूर से ही सलाम करने के पक्षधर रहे हैं । उनका मानना है कि देश को आगे ले जाने के लिए नेताओं को विचारधारा पर आधारित राजनीति करनी चाहिए ।

स्वास्थ्य कारणों से उन्हें सक्रिय राजनीति से हटना पड़ा है । यह देश की राजनीति के लिए अपूर्णीय क्षति है और देश का दुर्भाग्य है । उनके राजनीति में न रहने से एक शून्य सा बन गया है । आज देशभर में कोई ऐसा नेता दिखाई नहीं देता जो उनकी जगह ले सके । मानो ईश्वर ने यह जगह केवल उन्हीं के लिये बनाई हो ।

उन्हें देश को आगे ले जाने की बड़ी चिन्ता लगी रहती थी । शायद यही कारण रहा कि उनका स्वास्थ्य खराब हो गया और 54 वर्ष की अवस्था में जब अधिकांश नेता राजनीतिक जीवन की शुरूआत करते हैं उन्हें राजनीति को अलविदा कहना पड़ रहा है ।

उनके जैसे जनाधार वाले, बात के धनी और ईमानदार नेता सदी में दो चार ही जन्म लेते हैं । यदि उन्हें राजनीति से संन्यास न लेना पड़ता तो जनता के प्रेम की बदौलत वे एकदिन अवश्य ही प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचते और वह दिन भारत वर्ष के सौभाग्य का दिन होता । फिर कोई ताकत चाहे वह विदेशी हो या स्वदेशी, देश को विकसित राष्ट्र बनने से नहीं रोक सकती थी । हमारा विश्वास है कि अगर वे राजनीति करते रहते तो देश को जल्दी ही 22 वीं सदी में पहुँचा देते ।

किन्तु होनी को कौन टाल सका है ? ईश्वर की ऐसी ही इच्छा थी कि हमारा देश अभी कुछ दिन और विकसित राष्ट्र न बन सके । शायद इसी कारण उनका स्वास्थ्य खराब हो गया और उन्हें सक्रिय राजनीति से संन्यास लेना पड़ा ।

फिर भी हमें उम्मीद है कि जैसे सचिन तेंदुलकर भारतीय टीम के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी होकर भी सबसे अच्छा खेल सकते हैं वैसे ही अमर सिंह जी भी सक्रिय राजनीति से दूर रहकर भी अन्य लल्लू-पंजू नेताओं से तो ज्यादा राजनीति कर ही लेंगे ।

श्री सिंह जी सदैव ही सही समय पर सही निर्णय लेने के लिये जाने जाते रहे हैं । उनका कोई निर्णय गलत होगा ऐसी कल्पना भी नहीं की जा सकती । इसीलिए संकट के इस समय में हम उनके निर्णय का सम्मान करते हुए, चाहते हुए भी उन्हें राजनीति में वापस लौटने को न कहेंगे ।

हमारी ओर से उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं । धन्यवाद !

17 टिप्‍पणियां:

  1. सही है भैये !
    आपको फक्र है और होना ही चाहिए ....अमर सिंह जी चीज ही हैं ऐसी !
    वैसे भी आपने तारीफ ही तो की है.....दिल से अपने रोल मॉडल की !
    जय हो!!

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  2. बहुत खूब विवेक साहब
    क्या बात है
    आपकी पोस्ट पढ़कर फिल्म 'शोले' की याद आ गयी ,,,, जब 'जय' मौसी के पास जाकर 'वीरू' की तारीफें करता है !

    आपकी मारक शैली पर जरा गौर फरमाया जाए :
    "अब भी जब वे कपड़े बदलते समय अपने कुर्ते को उतारते होंगे तो निश्चित ही दो चार विधायक जेब से निकलकर गिर जाते होंगे ।"

    बहुत खूब

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  3. राजनीति के लिए बडे दिल-गुर्दे की ज़रूरत होती है। आशा है ईश्वर उनके गुर्दे जल्दी ठीक कर दे :)

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  4. अमर सिंह जी अमर रहें ....... आपने तो धोने में कोई कसर नही रक्खी ...... मज़ा आ गया ........

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  5. अमर सिंह जी अमर रहें ....... आपने तो धोने में कोई कसर नही रक्खी ...... मज़ा आ गया ........

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  6. बहुत बढ़िया आलेख। बहुत बहुत बधाई।

    सच मे अमर सिंह जी अमर रहें....लेकिन इस तरह के इस्तीफे वे पहले भी कई बार दे चुके हैं....शायद यह आखिरी हो.....लेकिन उम्मीद कम है...

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  7. अमर सिह जी अमर ही हैं । मगर हम ने तो टी वी पर उन्हें गुस्से मे ही देखा है? शायद हमे कुछ धोखा हुया है । देर बाद ब्लाग पर आने के लिये क्षमा चाहती हूँ

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  8. मुझे तो इसके चेहरे पर छल के सिवाए कुछ नजर नहीं आता मेरे भाई।

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  9. काश हम भी अलीगढ में पैदा हुए होते...!!

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  10. दु:ख की इस घड़ी-
    शुभ शुभ बोलिए

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  11. हम भी दुःख की इस घडी में आपके साथ है जी !
    हमें तो लगता है उनके स्वास्थ्य के ख़राब होने में भी उन तथाकथित देशी व विदेशी ताकतों का हाथ है जो हमारे देश को अमर सिंह जी जैसे नेता के हाथों विकसित राष्ट्र नहीं बनते देखना चाहते !!

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  12. अमर सिंह जी अमर रहें ....... आपने तो धोने में कोई कसर नही रक्खी ...... मज़ा आ गया ........

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  13. विवेक साहब, लगता है आपकी धुलाई मशीन एकदम नये माडल की है, धुलाई भी हो गई और दर्द भी नहीं महसूस हुआ(होगा)।

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