मंगलवार, सितंबर 28, 2010

चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है

     कविता लिखना अलग बात है, और मंच पर श्रोताओं के सामने कविता पाठ करना बिल्कुल दूसरी बात है । जैसे ब्लॉगर को टिप्पणी से खास लगाव हो जाता है,  वैसे ही  कवि को तालियाँ विशेष प्रिय होती हैं । किसी न किसी बहाने वे श्रोताओं को तालियों के लिए उकसाते रहते हैं । मंच पर कवियों की आपसी खींचतान  व एक दूसरे पर की जाने वाले टिप्पणियाँ भी कम मनोरंजक नहीं होतीं ।
कुछ इसी तरह के नज़ारे तब देखने को मिले जब पानीपत रिफाइनरी की टाउनशिप में कल रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ । यहाँ कवियों और कवयित्रियों ने अपने लटकों झटकों से उपस्थित कर्मचारियों को सपरिवार मोहित कर लिया ।
अलीगढ़ से आये विष्णु सक्सेना ने कवि सम्मेलन का शुभारम्भ सरस्वती वंदना से किया ।
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे थे सुनील जोगी । लखनऊ से आयीं डॉक्टर सुमन दुबे और जोगी जी के बीच काफी मजेदार वार्तालाप चला । जिसका श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया । दोनों ओर से इशारों इशारों में शब्दवाण छोड़े गए इससे माहौल खुशनुमा हो गया । सुमन दुबे ने कहा कि वे झाँसी की रानी बनकर काँटों को जमीन में दफ़ना देंगी तो सुनील जोगी महाराणा प्रताप बनने पर उतारू हो गए ।
सुमन दुबे के कण्ठ की मिठास ने सबका दिल छू लिया । उन्होंने शिकायत की कि  
लोग कहते हैं कि कोयल बनके गाना छोड़ दो ।
 इसके बाद श्री गुरु सक्सेना जी ने अपनी खास स्टाइल से श्रोताओं को हँसा हँसाकर लोटपोट कर दिया । सुनील जोगी यहाँ भी चुटकी लेने से नहीं चूके । उन्होंने गुर सक्सेना जी का परिचय कराते हुए कहा कि, " जो शाल को तह लगाने में मग्न हैं और बारात वाला सूट पहनकर आये हैं वे गुरु सक्सेना हैं । इनसे कहा गया कि चश्मा न लगाया करो कुरूप दिखते हो तो बोले,
"कि चश्मा न लगाएं तो तुम कुरूप दिखते हो ।""
 जोगी जी ने कहा इनके बारे में कहा कि
"इतने कमजोर हुए ये तेरी जुदाई से,
चींटी खींच ले जाती है इनको चारपाई से ।"
 इस पर गुरु सक्सेना ने कहा कि, "चींटी खींच ले जाती है तो किसी मकसद से ही ले जाती होगी ।" इनकी खास बात है कि कविता को तेज आवाज में शुरू करते हैं और धीमे होते जाते हैं ।
विष्णु सक्सेना का गीत  तालियों के बीच गाया गया । इनका कण्ठ भी मधुर है ।
"जिससे जितना प्यार करोगे, उतना रोओगे
दिल की जमीं पर जब फसल यादों की बोओगे"


अरुण जैमिनी के खड़े होते ही श्रोताओं के ठहाकों और तालियों से सभागार गूँजने लगा । हाँलांकि इन्होंने अपनी बहुत सुनी सुनाई राधेश्याम और सौ ग्राम सेब वाली कविता ही सुनाई लेकिन चुटुकुलों से श्रोताओं का खूब मनोरंजन किया । इनकी तो हर बात ही चुटकुला लगती है । बानगी देखिए:

सारे देश में ईसाई मिशनरी हैं । लेकिन हरियाणा में ईसाई मिशनरी क्यों नहीं है ? इसके पीछे कारण है । यहाँ भी ईसाई मिशनरी आए थे । लोगों को इकट्ठा किया, भाषण दिया । उसके बाद एक चौधरी ने पूछा "भाई नूँ बता यो जीसस कौण है ?" वे बोले कि "जीसस ईश्वर का पुत्र है" । इस पर चौधरी बोला कि "भाई हमारे यहाँ बाप के रहते बेटे को कोई नहीं पूछता । जब ईश्वर मर जाए तब अइयो । इब जाओ ।"



बुद्धिनाथ मिश्र यहाँ पिछली बार भी आये थे । उन्होंने अपने गीतों से समाँ बाँध दिया ।
डॉक्टर सीता सागर ने शहीदों की याद में मीठे कण्ठ से गीत सुनाकर माहौल को देशभक्ति मय बना दिया । शहीद भगत सिंह के जन्मदिवस के अवसर पर इन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि दी ।
मुझे सबसे अधिक प्रभावित किया राहत इंदौरी ने । इन्हें मैंने पहली बार ही सुना  ।  इन्होंने जिस मस्ती में डूबकर अपने शेर सुनाए उसमें श्रोताओं को भी डुबो दिया । सस्ते शेरों से शुरू करके धीरे धीरे जिस तरह ये ऊँचाई की तरफ ले गए वह स्टाइल बहुत भाया । एक शेर पेश है: 
"सितारों की नुमाइश में खलल पड़ता है,
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है ।"
संचालक महोदय ने राजनीतिज्ञों की खूब टाँग खींची । अंत में श्री अशोक ’चक्रधर’ ने कार्यक्रम का समापन किया । इनका तो अंदाज ही निराला है । शब्दों के जादूगर हैं । शब्दों के अर्थ को कहाँ से कहाँ ले जाएंगे कोई पहले से सोच भी नहीं पाता । चक्रधर जी ने जहाँ शहीद भगत सिंह को याद किया वहीं स्वर्गीय श्री कन्हैयालाल नंदन जी को भी याद किया । उन्होंने आशा व्यक्त की कि हिन्दी राज करेगी । हिन्दी को केवल मनोरंजन की भाषा बनाने के बजाय इन्होंने इसे ज्ञान की भाषा बनाने पर बल दिया ।  जब कवि सम्मेलन का समापन हुआ तो बारह से ज्यादा बज गए थे ।

15 टिप्‍पणियां:

  1. एक से एक नामी कवि आये.. जलन हो रही है... मुझे भी बहुत पसंद है.. कवि सम्मलेन.. आजकल यू ट्यूब पर खुब सुनता हूँ..

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्छी पंक्तिया लिखी है ........

    जाने काशी के बारे में और अपने विचार दे :-
    काशी - हिन्दू तीर्थ या गहरी आस्था....

    उत्तर देंहटाएं
  3. Padhke rashk ho raha hai...aapke aalekh ne ye sama baandha to sammelan kya gazab raha hoga! Maza aa gaya! Kaash ham bhi hote wahan!

    उत्तर देंहटाएं
  4. मैंने तो सुना था आपके यहाँ बारिश बहुत हो रही है धुप भी नहीं निकल रही है..
    अत: ये साबित होता है कि जहाँ ना पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि..

    उत्तर देंहटाएं
  5. पढ़कर बहुत अच्छा लगा! काश हम भी वहाँ होते तो भरपूर आनंद मिलता! सही में श्रोताओं के सामने कविता पाठ करने की बात ही अलग है! बहुत सुन्दरता से प्रस्तुत किया है! उम्दा पोस्ट!

    उत्तर देंहटाएं
  6. इन कवियों में विवेक दिखाई नहीं दिए:) अच्छी कमेन्टरी के लिए बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. आपको काव्यरस में डूब जाने पर बधाई। इलाहाबाद छूटने के बाद मेरा मन इस बात से दुखी है कि अब कवि सम्मेलन सुनने के अवसर नहीं मिल पाएंगे। वहाँ त्रिवेणी महोत्सव के मंच पर इनमें से अधिकांश कवियों को सुनने का अवसर मिला है। आपकी रिपोर्ट पढ़कर हम एक बार फिर वहीं पहुँच गये।

    उत्तर देंहटाएं
  8. मै तो सम्झा था कवि विवेक ने भी कविता सुनायी होगी .

    उत्तर देंहटाएं
  9. मंच पर यही लटके झटके तो चलते हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. जनाब ! क्या कहीं से इसकी रिकोर्डिंग को देखा भी जा सकता है ,आपकी पोस्ट पढकर देखने की इच्छा बढ़ गई है

    उत्तर देंहटाएं
  11. बहुत सुंदर लगा इस समाचार को पढना, देख ओर सुन कर कितना मजा आया होगा, धन्यवाद जी

    उत्तर देंहटाएं
  12. बहुत ही बढ़िया रिपोर्ट पेश की है आपने बहुत आनंद आया पढ़ने में जैसे वहीँ कहीं कवि सम्मलेन में ही बैठे हैं.
    आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  13. ये तो मजेदार रिपोर्टिंग हो गयी जी।

    उत्तर देंहटाएं
  14. बहुत ही बढिया और मजेदार रिपोर्टिंग रही।

    उत्तर देंहटाएं
  15. बढ़िया रिपोर्ट है ... बहुत आनंद आया पढ़ने में ....

    उत्तर देंहटाएं

मित्रगण