शनिवार, सितंबर 18, 2010

पाकिस्तान का अप्रत्याशित प्रस्ताव

पाकिस्तान के हालात दिन पर दिन खराब होते जा रहे थे । कहीं बाढ़ कहीं आतंकवाद की मार तो कहीं गरीबी । अब उसकी हालत ऐसे रोगी जैसी हो रही थी जो जीवनरक्षक यंत्रों के सहारे ही जीवित हो । फिर भी वह भारत में घुसपैठिये भेजने से बाज नहीं आ रहा था । उसकी जिद थी कि उसे किसी भी कीमत पर  कश्मीर चाहिए ।

इधर भारत भी पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर से अपना दावा छोड़ने को तैयार न था । ऐसे में भारत ने जब संयुक्त राष्ट्र में अपनी माँग को दोहराया तो पाकिस्तान ने ऐसा प्रस्ताव रख दिया जिसकी उम्मीद शायद किसी को सपने में भी न होगी । उसने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि या तो पूरा कश्मीर ही उसे सौंप दिया जाय या फिर हमारे कब्जे वाले कश्मीर को ही नहीं बल्कि पूरे पाकिस्तान को ही भारत में विलय कर लिया जाय । इस प्रस्ताव से पूरी दुनिया में सनसनी फैल गयी । अमेरिका और चीन वालों ने अपने अपने माथे ठोक लिये । इनकी देखादेखी (तथाकथित) ग्रेट ब्रिटेन और उत्तर कोरिया ने भी अपने माथे ठोक लिए । देखते ही देखते पूरा सभागार ठक ठक की आवाजों से गूँजने लगा । शान्ति की अपील की गयी तो शान्ति ने आकर सबको शान्त कर दिया । अब सबकी नज़रें भारत पर टिकी थीं । भारत खड़ा खड़ा शरमा रहा था । कोई शर्मा जी भी शायद इतना न शरमाते होंगे । ऐसा अवसर उसके जीवन में बहुत शताब्दियों बाद आया था कि सारा संसार किसी निर्णय की आशा में उसकी ओर देखे ।

इस प्रस्ताव पर फैसला लेना इतना आसान नहीं था । जिस देश को एक फाँसी की सजा प्राप्त कैदी की माफी पर निर्णय लेने में कई साल लग जाएं वह भला इतना बड़ा निर्णय तुरन्त कैसे ले सकता था । इसके लिए कुछ समय लेने की बात  कहकर फैसले को टाल दिया गया । लेकिन इससे देश में एक बहस चल पड़ी । जो लोग अब तक भारत के विभाजन पर आँसू बहाते नहीं थकते थे वे पाकिस्तान के विलय का विरोध कर रहे थे । देश में हिन्दुओं के अल्पसंख्यक हो जाने की आशंकाए व्यक्त की जा रहीं थी । प्रचार किया जा रहा था कि पाकिस्तान हमारे ऊपर बोझ बन जाएगा । हमारी सारी तरक्की धरी रह जाएगी । यह कोई अन्तर्राष्ट्रीय साजिश है या तालिबान का षडयंत्र है । 
वहीं कुछ लोग इसपर फूले नहीं समा रहे थे । जो भारत छोड़कर पाकिस्तान जाना चाहते थे उनके लिए अब भारत में ही पाकिस्तान का इंतजाम हो जाएगा ।
उधर स्वर्ग में बैठे हमारे स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले नेता महात्मा गाँधी, जिन्ना, नेहरू जी आदि में बहस चल रही थी ।
हमारी संसद ने भी जिम्मेदारी जनता पर डालते हुए इस प्रश्न पर जनमत कराने का निर्णय ले लिया । जनमत संग्रह के लिए मतदान हो गया । परिणाम घोषित होने की तारीख भी आ गयी । पर एक अजीब सी शान्ति ने पूरे संसार को और देश को अपने आगोश में ले रखा था । टीवी चैनल भी कुछ बहस आदि से परहेज कर रहे थे । जैसे ही रुझान देखने के लिए मैंने अपने टीवी पर न्यूज चैनल लगाया । पत्नी ने मुझे जगा दिया और इस तरह यह सपना अधूरा ही रह गया । 

9 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छा हुआ जो ये सपना था कही पाकिस्तान इण्डिया में मिल जाता तो महेश भट्ट की तो दुकान ही बंद हो जाती ..

    मस्त पोस्ट है

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  2. सो-काल्ड सेकुलरिज्म तभी तक है जब तक हिन्दुओं की संख्या अधिक है. जिस दिन मुस्लिम चालीस प्रतिशत हो जायेंगे उसी दिन ये सेकुलरिज्म हवा हो जायेगी.... पाकिस्तान, बांग्लादेश इसके साक्षात उदाहरण हैं. वैसे भी भारतीय (विशेषत: हिन्दुओं) की विशेषता है कि उन्होंने हमेशा शुतुरमुर्ग से प्रेरणा ग्रहण की है....

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  3. ` पूरे पाकिस्तान को ही भारत में विलय कर लिया जाय । '
    खस कम जहां पाक :)

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  4. kuchh or khuraapaat nahi sujhi...:)

    nahi chaahiye bhai.. yanhaa khud ki phati bhi nahi sil rahi... paak ki phati kaun silega...

    (aaj malaware ki khabar nahi aaye..)

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  5. कैसे कैसे सपने लेते --- राम राम हमे तो डरा ही दिया था। शुभकामनायें।

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  6. मेरा विचार है कि जो लोग ब्लॉग पर टिप्पणी केवल इसलिए करते हैं कि लेखक महिला है, वे लोग कुछ दिन बाद अपने आप ब्लॉग पर आना बन्द कर देंगे। यह इसलिए कि उन्हें कोई नया शिकार मिल गया है!

    अंत में इतना और कहूँगा।
    आप केवल तीन महीने से ब्लॉग जगत में सक्रिय रही हैं
    इतने कम समय में अवश्य आपको टिप्पणियाँ बहुत ज्यादा मिल रही हैं।
    पर इसका कारण है कि विषय रोचक है या विवादास्पद है।
    इसलिए नहीं कि आप एक महिला हैं। और भी महिलाएं पहले से ही ब्लॉग जगत में सक्रिय रहीं हैं ।
    उनहें क्यों इतनी टिप्प्णियाँ नहीं मिलती?

    यदि आजमाना चाहती हैं तो एक बार किसी गैर विवादास्पद विषय पर एक गंभीर लेख लिख डालिया
    (आप डॉक्टर हैं तो आप किसी मेडिकल विषय पर गंभीर लेख लिख सकती हैं)
    फ़िर देखिए कितनी टिप्पणियाँ मिलती हैं।
    दो या तीन शब्द वाली टिप्पणियों को include न करें। वे तो महज attendance markers हैं, यह साबित करने के लिए के पाठकने आपका लेख पढा और अब आपकी की बारी है उनके यहाँ जाने की। किसी ने इसे barter system कहा था। सही शब्द है।

    ऐसे ही लिखते रहिए। देख रहा हूँ यहाँ ट्रैफ़िक काफ़ी बढ गया है!
    और भी बढें !

    शुभकामनाएं
    जी विश्वनाथ

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  7. Sorry.
    The above comment was in continuation to my comment on Diyva Srivastav's blog.
    It should not have appeared here.
    Both windows were open and I made a mistake in clicking send too early.

    My apologies.
    G Vishwanath

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