मंगलवार, सितंबर 09, 2008

टिप्पणी कथा

सुनो भई साधो ! त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम ने एक धोबी की टिप्पणी के कारण सीताजी का त्याग कर दिया तो सीताजी का दिल टूट गया । आखिर उन्हें इस प्रकार के व्यवहार की उम्मीद कम से कम श्रीराम से तो नहीं थी . सीताजी को गहन मनन के बाद पता चला कि इस दुर्घटना के मूल में एक टिप्पणी थी . फौरन उन्होंने टिप्पणी को शाप दे दिया कि," हे टिप्पणी ! तेरे कारण मुझे आज घर से बेघर होना पड़ रहा है । जा अब से तुझे सब लोग हिकारत की नज़र से देखेंगे और आज के बाद जिस किसी के काम पर कोई टीका टिप्पणी की जाएगी वह टिप्पणी करने वाले को मन ही मन कोसेगा अवश्य . हो सकता है बात आमने सामने की हो तो थापधौल भी हो जाय ." इतना सुनते ही टिप्पणी प्रकट हुई . उसने सीताजी से सर्वप्रथम बिना गलती की क्षमा माँग ली और पैरों में गिरकर पूछा," माता ! मेरा अपराध क्या है ?आखिर गलती तो धोबी की थी न ?" सीताजी का दिमाग कुछ कूल हुआ तो उन्हें फील हुआ कि कुछ ज्यादा ही हो गया था . पर अब क्या हो सकता था ? शाप का एलान तो हो चुका था . न्यूज चैनलों पर चटखारे ले लेकर दिखाया भी जा चुका था . पर आखिर संकट मोचक इति नाम अंजनिपुत्र का ऐसे ही नहीं पड़ गया था . हनुमान जी ने तुरन्त एक झकास आइडिया सुझाया और जाकर माता सीता के कान में बोले," माता ! आपने अभी तक इस बेचारी के शाप की अवधि डिसाइड नहीं की है . उसमें थोड़ी ढील की गुंजाइश अभी बाकी है ." टिप्पणी बोली," ढील ही नहीं माता कम्पेंजेशन भी चाहिये . आखिर मैं बेकसूर हूँ ."सीताजी ने कहा," जा ! जब कलयुग में ब्लॉग का धरती पर अवतार होगा तो ब्लॉगर नाम के सह्जीवी भी उसके आसपास भिनभिनाने हेतु जन्म लेंगे . धोबियों की संख्या में गिरावट आएगी ."(आखिर वाशिंग मशीन का आविष्कार जो होना था .)इन ब्लॉगरों के द्वारा तेरी पूजा की जायेगी . ये प्राणी अपना ब्लॉग लिखकर विश्वनाथन आनंद की मुद्रा में बैठकर टिप्पणी आने का इंतज़ार करते नज़र आएंगे . टिप्पणियों का आदान प्रदान भी होगा म्युचुअल ट्रन्सफर भी . टिप्पणी न मिलने की सूरत में ब्लॉगर ब्लॉगिंग छोड़ने तक की धमकी देकर गरीब ब्लॉगरों को ब्लैकमेल करते नज़र आ सकते हैं ।" इतना सुनते ही टिप्पणी ने माता सीता के चरण पकड लिए और "आप धन्य हैं !, आप धन्य हैं ! " ऐसा कहती हुई खुशी से पागल हो गई । अब कलयुग के हालात से तो आप सभी भली भाँति वाकिफ ही हैं .

10 टिप्‍पणियां:

  1. शाबाश वत्स, आयुष्मान भवो. तुम्हारी कथा वाचन हम बहुत प्रसन्न हुए और तुम्हें वरदान देते हें कि तुम्हें बहुत टिप्पणियाँ मिले और जो कोई टिप्पणी माता की कथा को श्रद्धा से नमन करेगा उसे माता खूब टिप्पीणयाँ देगीं

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  2. "wah, great style to describe the story of comments, well said comments dropped on diffrent blog's always encourage the writer to write more and more with new creativity. thanks for your wonderful thoughts and style"

    Regards

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  3. बहुत अच्छा लिखा है. हास्य का सहारा लेकर दिल की बात कह देना हर किसी के बस की बात नहीं होती. बधाई स्वीकारें, सस्नेह

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  4. वाह एक अदद टिप्पणी की दरकार इधर भी है !

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  5. Aap ye n sochen ke aap hamaare comments se bachenge. No no no no no no. itnee achhee abhivyakti ke baad aapko hamaaree dad lenee he hogi. nosh farmaiye.
    Vivekjee itna achha mat likha keejiye. nazar lagtee hai bhai. samajhte nahin hain aap.

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