शर्म मँगाओ !
संसद के गलियारों में है इसकी किल्लत
शर्म मँगाओ !
बम फूटे हौसला न टूटे,
मंत्रालय न हाथ से जाए ।
चाहे पड़े झेलनी जिल्लत
पर मंत्रीपद को न गँवाओ
शर्म मँगाओ !
बिना शर्म के नहीं चलेगा
कुछ उपाय कुछ बात करो
करो देश में ही वसूल
या बाहर से आयात कराओ
शर्म मँगाओ !
संसद के गलियारों में है इसकी किल्लत
शर्म मँगाओ !
सटीक बात कही है आपने .....एकदम सही
प्रत्युत्तर देंहटाएंशर्म भी बेच कर खा गए यह तो ...
प्रत्युत्तर देंहटाएंबडी किल्लत है भाइ इस माल की जिसका नाम शर्म है :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंशर्म की जरूरत है किसे, कम से कम राजनीतिबाजों को तो नहीं.
प्रत्युत्तर देंहटाएंशर्म के स्टॉक को राजनीती में कौन पूछता है जी उन्हें तो बेशर्मी का स्टॉक चाहिए
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