Wednesday, September 07, 2011

शर्म मँगाओ




शर्म मँगाओ !


संसद के गलियारों में है इसकी किल्लत


शर्म मँगाओ !



बम फूटे हौसला न टूटे,


मंत्रालय न हाथ से जाए ।


चाहे पड़े झेलनी जिल्लत


पर मंत्रीपद को न गँवाओ


शर्म मँगाओ !


बिना शर्म के नहीं चलेगा


कुछ उपाय कुछ बात करो


करो देश में ही वसूल


या बाहर से आयात कराओ


शर्म मँगाओ !



संसद के गलियारों में है इसकी किल्लत


शर्म मँगाओ !

5 प्रतिक्रियाएँ:

  1. बडी किल्लत है भाइ इस माल की जिसका नाम शर्म है :)

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  2. शर्म की जरूरत है किसे, कम से कम राजनीतिबाजों को तो नहीं.

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  3. शर्म के स्टॉक को राजनीती में कौन पूछता है जी उन्हें तो बेशर्मी का स्टॉक चाहिए

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