मंगलवार, फ़रवरी 21, 2012

राष्ट्रीय एकता एवं प्रगति में हिन्दी भाषा का महत्व

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   इस निबंध को हिन्दी दिवस के अवसर पर नगर स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के लिए लिखा गया था । जब इसे प्रथम पुरस्कार मिल गया तो जनता की भारी माँग पर इसे यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है ।

16 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ..
    बहुत ही बढिया लेख है ..
    अभी सरसरी निगाह से ही देखी हूं ..
    पढती हूं अब गंभीरता से..
    बहुत बहुत बधाई !!

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद संगीता जी ।

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    2. विवेक जी मेरा नाम राजवीर सिंह है हम एक साहित्य पत्रिका सर्वोतम पत्र निकलते है पिछले डो साल से आपका लेख पढ़ा अच्छा लगा sarvotampatra@gmail.com ओर नंबर 9810857360 है आप हमे आपके लेख ओर आपका पता भेजे आपको हम पत्रिका भेजते है हम आपके लेख अपनी प्रतिका में प्रस्तुत करेंगे धन्यवाद

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  2. हिंदी हमारे खून में हिमोग्लोबीन की तरह हैं .खून में हिंदी की कमी से राष्ट्र पंगु हो सकता है .खून में हिंदी का मान्य स्तर बनाए रखिये .

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  3. ये तो बहुत अच्छा लिख मारा जी। राइटिंग भी चकाचक है। बधाई फ़िर से। :)

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  4. आपका यह निबंध बारहा पढने लायक है .हिंदी का अपना प्रवाह है जितना इसे दबाया जाता है यह आगे बढती है और अब तो कोई विज्ञापन हिंदी के बिना पूरा ही नहीं होता है .आजकल की कामकाजी मीडिया की भाषा है हिंदी .

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  5. सरसरी निगाह ही पड़ी है अभी
    देखते/ पढ़ते/ ग्रहण करते हैं आराम से
    पाबला किराना को देखते आ पहुंचे हम तो :-)

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  6. hindi ke samarthan me bade hi prabhavshali tareeke se aapne apna paksh rakha.

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  7. Hindi Bhasha ko Adhik parbhavshali bnane ke liye Aap sabhi ka bar-bar dhanvad . mujhe hindhi kavita likhne ka bada hi shokh hai Aap meri kavitaon ko pfrkashit kar skate hai .

    Ratan Sharma
    Hindi- PGT
    The Aditya Birla Public School
    GCW-Kovaya, Amreli, Gujarat-365541
    Phone- 9427491297

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  8. Vivak bhi ji bhut hi gazab lekh likh likha hai apne.. kya baat hai,,

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  9. well done. dont know much abt hindi bt ab zarroor koshih rahegi

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  10. बहुत खुद.. बहुत ही अच्छा निबंध है..
    बधाई

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  11. विवेक सिंह जी
    जिसको न निज गौरव, न निज देश का, अभिमान है,
    वह नर नही, नर पशु निरा है, और मृतक समान है।
    इस कविता को मैथली शरण गुप्त ने लिखा है आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी जी नहीं ।
    द्विवेदी जी गद्यकार थे पद्यकार नहीं ।

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    1. Raj Kumar Mahto जी
      आपका हार्दिक धन्यवाद । कृपया यह भी बताएं कि मैथिलीशरण गुप्त जी ने यह पंक्तियाँ कहाँ लिखी हैं ?

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