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इस निबंध को हिन्दी दिवस के अवसर पर नगर स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के लिए लिखा गया था । जब इसे प्रथम पुरस्कार मिल गया तो जनता की भारी माँग पर इसे यहाँ प्रस्तुत किया जा रहा है ।
आपका यह निबंध बारहा पढने लायक है .हिंदी का अपना प्रवाह है जितना इसे दबाया जाता है यह आगे बढती है और अब तो कोई विज्ञापन हिंदी के बिना पूरा ही नहीं होता है .आजकल की कामकाजी मीडिया की भाषा है हिंदी .
वाह ..
प्रत्युत्तर देंहटाएंबहुत ही बढिया लेख है ..
अभी सरसरी निगाह से ही देखी हूं ..
पढती हूं अब गंभीरता से..
बहुत बहुत बधाई !!
बहुत बहुत धन्यवाद संगीता जी ।
हटाएंबहुत ही प्रभावशाली...
प्रत्युत्तर देंहटाएंहिंदी हमारे खून में हिमोग्लोबीन की तरह हैं .खून में हिंदी की कमी से राष्ट्र पंगु हो सकता है .खून में हिंदी का मान्य स्तर बनाए रखिये .
प्रत्युत्तर देंहटाएंये तो बहुत अच्छा लिख मारा जी। राइटिंग भी चकाचक है। बधाई फ़िर से। :)
प्रत्युत्तर देंहटाएंवाकई काविले तारीफ़ !
प्रत्युत्तर देंहटाएंआपका यह निबंध बारहा पढने लायक है .हिंदी का अपना प्रवाह है जितना इसे दबाया जाता है यह आगे बढती है और अब तो कोई विज्ञापन हिंदी के बिना पूरा ही नहीं होता है .आजकल की कामकाजी मीडिया की भाषा है हिंदी .
प्रत्युत्तर देंहटाएंसरसरी निगाह ही पड़ी है अभी
प्रत्युत्तर देंहटाएंदेखते/ पढ़ते/ ग्रहण करते हैं आराम से
पाबला किराना को देखते आ पहुंचे हम तो :-)