बगल में जो मक्का की फ़सल दिखाई दे रही है वह हमारी गाढ़ी मेहनत का नतीजा है । घर के सामने पड़ी खाली जमीन को घास छीलकर खेती योग्य बनाया गया और फ़ावड़े से गुड़ाई करने के बाद इसमें कई तरह की पौध लगायी गयी जिनमें फ़ूलगोभी, टमाटर, बैंगन, मिर्च, और शिमला मिर्च का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा । भिण्डी, पालक, लौकी, तोरई, अरबी आदि के बीज बोये गये । और मक्का का आइडिया सबसे बाद में आया । अब इसमें छर्रा निकल आया है और भुट्टे की दाढ़ी भी लटकने लगी है । पालक ने अब तक कई बार साग खिलाया है । बैंगन ने भी इतना निराश तो नहीं किया कि उस बेचारे की बदनामी आपके सामने ही करूँ पर टमाटर धोखेबाजी में सबसे आगे रहे और बिना बताये ही खिसक लिए जैसे हम क्लास के पिछले दरवाजे से चुपचाप खिसक जाया करते थे । गोभी से हमें आशा न थी फ़िर भी काफ़ी दिन तक उसने हमारा साथ दिया तो आस बँधने लगी थी लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि उससे हमने उम्मीदें लगा लीं हैं बेचारी उम्मीदों का बोझ नहीं झेल पाई और कोई न कोई बहाना करके सभी पौधे निकल लिए । मिर्च पर हमें कभी संदेह न था । पर अब रोजाना एक पौधा हमारे देखते देखते मुरझा जाता है फ़िर सूख जाता है और हम मजबूर हैं कुछ नहीं कर पा रहे । लौकी को पड़ौसियों की नज़र खा गई । खूब लम्बी बेल है । फ़ूल भी खूब आते हैं । चोइया लगता है और दो दिन बाद सूख जाता है । अरबी को कई बार चेक कर लिया है पर धरती के ऊपर जैसा हालचाल दिखाई देता है वैसा नीचे नहीं है फ़िर भी कहते हैं कि आशा पर दुनिया टिकी है तो हमने भी उसे कह दिया है कि बिना टेंशन लिए जितना हो सके उतना ही करे । जान जोखिम में न डाले ।मक्का पर तो हमें गर्व होता है ।
इसने हमारा मन मोह लिया है । इसकी दाढ़ी के तो कहने ही क्या । बचपन में ही जैसे इसे बुढ़ापा आ गया हो । जब अपनी मेहनत का पहला भुट्टा खाने को मिलेगा उस दिन का हम सभी को बेसब्री से इन्तजार है । अभी से योजनाएं बनने लगी हैं कि किस किस पड़ौसी के घर कितने भुट्टे दिये जा सकते हैं । यह मक्का मेरा राजा बेटा है । जिसके बिना मेरा खेती करने का सारा उत्साह जाता रहता । पर अब मुझे एक नया जोश मिल गया है । क्योंकि सफ़लता जोश भर ही देती है । चाहे वह कितनी ही असफ़लताओं के बाद क्यों न मिली हो । असफ़ल व्यक्ति में कमियाँ ढूँढ़ना बड़ा आसान होता है । और उससे भी कहीं अधिक आसान किसी सफ़ल व्यक्ति के गुण ढूँढ़ना होता है ।नोट : हमारे गुरु श्री शिवकुमार मिश्र जी स्वप्नलोक पर अब तक 44 टिप्पणियाँ करने में सफ़ल रहे हैं । कम्पनी उन्हें विनम्रतापूर्वक बधाई देती है ! यह भी एक सुखद संयोग ही है कि उनका चवालीसा हमारी 116 वीं पोस्ट की पूर्व संध्या पर पूरा हुआ !