समाचार हिन्दी चिट्ठों के सुनिए आप लगाकर ध्यान ।
रद्दी कविता प्रस्तुत करते पकड़े शिवकुमार ने ज्ञान ।।
आर्थिक मंदी शुरू हुई के ? पूछें ताऊ देउ बताय ।
चिडिया गदही पुकारती थी कैसा कलयुग आया हाय ॥
फिर हाज़िर एक चित्रपहेली अरविंद मिश्रा ने की आज ।
सरिताजी ने खोला आखिर छलिया चाँद छलनी का राज ।।
मार्क्सवाद आपराधिक है घोस्टबस्टर के सुनें विचार ।
जागा मगर प्रेत इसका ये कहें द्विवेदी जी इस बार ॥
फुटकर सोच पाण्डेय जी की बढा ब्लॉग पर यातायात ।
मिला खज़ाना अलमारी में वडनेरकरजी की क्या बात ॥
मॉर्डन नारी बनना हो तो अचूक नुस्खा है तैयार ।
अगर डराना है दोस्तों को है षडयन्त्र यहाँ तैयार ॥
मनविंदर भिंभर कहती हैं वे रब तेरा भला करे ।
यहाँ नीलिमा सुना रही है मृत्युगीत अब कौन मरे ॥
छणिकाएं जो पढनी हों तो नीशू ने की हैं तैयार ।
किन्तु राधिका बुधकर का यह है मार्मिक आरोही प्यार ! ॥
संभव है कि इस ब्लॉग पर लिखी बातें मेरी विचारधारा का प्रतिनिधित्व न करती हों । यहाँ लिखी बातें विभिन्न दृष्टिकोणों से सोचने का परिणाम हैं । कृपया किसी प्रकार का पूर्वाग्रह न रखें ।
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शनिवार, अक्टूबर 18, 2008
रविवार, अक्टूबर 12, 2008
हिन्दी का विस्तार
आओ सब मिलकर करें, हिन्दी का विस्तार
खुलकर सब भाषाओं, से ले लें शब्द उधार
ले लें शब्द उधार ,न फिर उनको लौटाएँ
डटकर करें विवाद, उन्हें अपना बतलाएँ
विवेक सिंह यों कहें,आइडिया नया नहीं है
किस भाषा में गैरों के अल्फाज़ नहीं हैं ?
खुलकर सब भाषाओं, से ले लें शब्द उधार
ले लें शब्द उधार ,न फिर उनको लौटाएँ
डटकर करें विवाद, उन्हें अपना बतलाएँ
विवेक सिंह यों कहें,आइडिया नया नहीं है
किस भाषा में गैरों के अल्फाज़ नहीं हैं ?
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