शनिवार, अक्तूबर 02, 2010

बापू फिर से आइये

























बापू फिर से आइये, भारत में इक बार ।
नीति अहिंसा की यहाँ, लागू भली प्रकार ॥
लागू भली प्रकार, न दी अफ़जल को फाँसी ।
फूलें हाथ-पैर यदि हो कसाब को खाँसी ॥
विवेक सिंह यों कहें, उतारी हिंसा सिर से ।
भारत में इक बार आइये बापू फिर से ॥

7 टिप्‍पणियां:

  1. आज की परिस्थितियाँ देख गाँधीजी को हृदयाघात निश्चित है।

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  2. विवेक जी ,
    सामयिक कुण्डली के लिए बधाई.
    २ अक्तूबर की सार्थकता याद रखी आपने.

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  3. बापू किसे फ़ांसी की सजा सुनायेगा ?? ओर किसे बचायेगा??

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  4. ‘भारत में इक बार आइये बापू फिर से ’

    आएंगे, पर करेंगे क्या :)

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  5. फूलें हाथ पैर जो अफजल को हो खाँसी--- वाह वाह गज़ब बात कही। शुभकामनायें।

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