सोमवार, सितंबर 27, 2010

कुआँ खोदकर पानी पीना

पिछले दिनों हमारे शुभचिन्तकों ने सूचित किया कि स्वप्नलोक पर विषाणु सक्रिय हो रहे हैं । उनकी सभी सिफारिशों को अमली जामा पहनाते हुए हमने एक्कोएक विजेट को हटा डाला । पर साइड में रैण्डमली चलने वाला "स्वप्नलोक में अब तक" वाला रोल हमें बहुत प्रिय था । जिस साइट से इसके लिए आउट सोर्स किया था शायद उसी से वायरस का आक्रमण हो रहा था ।
इन मामलों में अपनी जानकारी तो शून्य थी । अब क्या हो ?
आखिर हमने गहरे पानी में उतरने का फैसला किया । और उसके लिए कुछ  HTML सीखा । कुछ java script सीखा ।
और तैयार किया यह विजेट जो अभी साइड में चल रहा है । जरा बताइये तो मीठा है या खारा है अपने खोदे कुएं का पानी ?

शहीद शिरोमणि भगत सिंह

आज अमर शहीद भगत सिंह का जन्मदिवस है । 27 सितम्बर 1907 भगत सिंह का जन्म पंजाब प्रान्त के लायलपुर जिले के बंगा नामक गाँव में हुआ था । जो अब पाकिस्तान में है ।

गुरुवार, सितंबर 23, 2010

देश की अस्मिता के लिए मातृभाषा की आवश्यकता




प्रस्तुत निबंध हमारी कम्पनी द्वारा आयोजित निबंध प्रतियोगिता में लिखकर दिया है । देने से पहले एक कॉपी करा ली ताकि और कुछ इनाम विनाम मिले या न मिले पर एक पोस्ट तो निकाल ही ली जाए अपनी इतनी मेहनत के बाद ।














शनिवार, सितंबर 18, 2010

पाकिस्तान का अप्रत्याशित प्रस्ताव

पाकिस्तान के हालात दिन पर दिन खराब होते जा रहे थे । कहीं बाढ़ कहीं आतंकवाद की मार तो कहीं गरीबी । अब उसकी हालत ऐसे रोगी जैसी हो रही थी जो जीवनरक्षक यंत्रों के सहारे ही जीवित हो । फिर भी वह भारत में घुसपैठिये भेजने से बाज नहीं आ रहा था । उसकी जिद थी कि उसे किसी भी कीमत पर  कश्मीर चाहिए ।

इधर भारत भी पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर से अपना दावा छोड़ने को तैयार न था । ऐसे में भारत ने जब संयुक्त राष्ट्र में अपनी माँग को दोहराया तो पाकिस्तान ने ऐसा प्रस्ताव रख दिया जिसकी उम्मीद शायद किसी को सपने में भी न होगी । उसने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि या तो पूरा कश्मीर ही उसे सौंप दिया जाय या फिर हमारे कब्जे वाले कश्मीर को ही नहीं बल्कि पूरे पाकिस्तान को ही भारत में विलय कर लिया जाय । इस प्रस्ताव से पूरी दुनिया में सनसनी फैल गयी । अमेरिका और चीन वालों ने अपने अपने माथे ठोक लिये । इनकी देखादेखी (तथाकथित) ग्रेट ब्रिटेन और उत्तर कोरिया ने भी अपने माथे ठोक लिए । देखते ही देखते पूरा सभागार ठक ठक की आवाजों से गूँजने लगा । शान्ति की अपील की गयी तो शान्ति ने आकर सबको शान्त कर दिया । अब सबकी नज़रें भारत पर टिकी थीं । भारत खड़ा खड़ा शरमा रहा था । कोई शर्मा जी भी शायद इतना न शरमाते होंगे । ऐसा अवसर उसके जीवन में बहुत शताब्दियों बाद आया था कि सारा संसार किसी निर्णय की आशा में उसकी ओर देखे ।

इस प्रस्ताव पर फैसला लेना इतना आसान नहीं था । जिस देश को एक फाँसी की सजा प्राप्त कैदी की माफी पर निर्णय लेने में कई साल लग जाएं वह भला इतना बड़ा निर्णय तुरन्त कैसे ले सकता था । इसके लिए कुछ समय लेने की बात  कहकर फैसले को टाल दिया गया । लेकिन इससे देश में एक बहस चल पड़ी । जो लोग अब तक भारत के विभाजन पर आँसू बहाते नहीं थकते थे वे पाकिस्तान के विलय का विरोध कर रहे थे । देश में हिन्दुओं के अल्पसंख्यक हो जाने की आशंकाए व्यक्त की जा रहीं थी । प्रचार किया जा रहा था कि पाकिस्तान हमारे ऊपर बोझ बन जाएगा । हमारी सारी तरक्की धरी रह जाएगी । यह कोई अन्तर्राष्ट्रीय साजिश है या तालिबान का षडयंत्र है । 
वहीं कुछ लोग इसपर फूले नहीं समा रहे थे । जो भारत छोड़कर पाकिस्तान जाना चाहते थे उनके लिए अब भारत में ही पाकिस्तान का इंतजाम हो जाएगा ।
उधर स्वर्ग में बैठे हमारे स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले नेता महात्मा गाँधी, जिन्ना, नेहरू जी आदि में बहस चल रही थी ।
हमारी संसद ने भी जिम्मेदारी जनता पर डालते हुए इस प्रश्न पर जनमत कराने का निर्णय ले लिया । जनमत संग्रह के लिए मतदान हो गया । परिणाम घोषित होने की तारीख भी आ गयी । पर एक अजीब सी शान्ति ने पूरे संसार को और देश को अपने आगोश में ले रखा था । टीवी चैनल भी कुछ बहस आदि से परहेज कर रहे थे । जैसे ही रुझान देखने के लिए मैंने अपने टीवी पर न्यूज चैनल लगाया । पत्नी ने मुझे जगा दिया और इस तरह यह सपना अधूरा ही रह गया । 

शुक्रवार, सितंबर 17, 2010

आवश्यकता है एक अनुवादक की

किसी अहिंसावादी को एक मच्छर ने काट लिया । अहिंसावादी ने मच्छर को देखा तो सोचा स्वयं ही उड़ जाएगा हिंसा करने से क्या फायदा ? लेकिन शायद मच्छर भी पूरा होमवर्क करके आया था । उसको भी पता था कि मैं जिसका रक्त चूस रहा हूँ वह निरा अहिंसावादी है । अत:  वह निभर्य होकर अपने काम में लगा रहा ।

अहिंसक को विश्वास हो गया कि यह बिना बलप्रयोग के रक्त चूसना बंद नहीं करेगा । फिर भी उन्होंने कानून को अपने हाथ में लेना उचित न समझा । उस मच्छर को वे किसी तरह एक बोतल में बन्द करके थाने ले गए । वहाँ जब उन्होंने रिपोर्ट  लिखवानी चाही तो पहले तो थानेदार ने रिपोर्ट लिखने में असमर्थता जताई लेकिन सत्याग्रह की धमकी  देने पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई । मच्छर को न्यायाधीश के सामने प्रस्तुत किया गया जिन्होंने उसे पुलिस रिमाण्ड पर भेज दिया ।
पुलिस ने पूछताछ में पाया कि मच्छर दोषी है । मच्छर को जेल भेज दिया गया । जेल में उसकी सेल बनी  वह बोतल जिसमें वह बन्द था । उसके लिए एक वकील की व्यवस्था की गयी ।
पहली सुनवाई पर मच्छर के वकील ने न्यायाधीश से माँग की कि मच्छर की भाषा का अंग्रेजी अनुवाद करने के लिए किसी अनुवादक की व्यवस्था की जाय ।
ऐसा कोई अनुवादक अब तक नहीं मिला जो मच्छर की भाषा का अंग्रेजी में अनुवाद कर सके । तलाश जारी है । यदि आप को यह विद्या आती हो तो रोजाना अखबार पढ़ते रहें । इसके विज्ञापन निकलते रहते हैं । यहाँ ब्लॉगिंग में क्या रखा है ?
लेकिन एक बात समझ नहीं आयी । पुलिस ने मच्छर से पूछताछ किस भाषा में की होगी ?

गुरुवार, सितंबर 16, 2010

हम ही रोटी हम ही अचार

इस ब्लॉगिंग रूपी बगिया में
हम ब्लॉगर भँवरे आते हैं
कर करके कितने ही जुगाड़
हम अपना ब्लॉग सजाते हैं

मन के विचार मानो कलियाँ
जो खिलकर बनतीं पोस्ट फूल
टिप्पणियों को मकरन्द समझ
मँडराते रहते झूल झूल

हम लिखकर पोस्ट बैठ जाते
अब टिप्पणियों का इंतजार
कुछ उधार वापस मिल जाएं
चढ़ जाए कुछ कर्ज का भार

यदि हो आवश्यक काम कहीं
उठते हैं बुझे हुए मन से
आत्मा ब्लॉग पर ही रहती
बाहर जाते हैं बस तन से

अच्छी मिल जाएं या कि बुरी
कुछ मिले प्रशंसा या निन्दा
अवसर हो घमण्ड करने का
या फिर बेशक हों शर्मिन्दा

हम लेखक, और प्रकाशक भी
हम पाठक, हम टिप्पणीकार
हम नामचीन, हम बेनामी
हम ही रोटी, हम ही अचार

हम चर्चित, चर्चाकार हमीं
हम ही कहते, "है अर्ज़ किया"
इरशाद बोलकर हमने ही
फिर वाह वाह का फ़र्ज़ किया

हम झगड़ालू, हम अशान्तिप्रिय
तू तू मैं भी करते हैं
हा हा ठी ठी भी कर लेते
फिर शान्तिपाठ भी पढ़ते हैं

घर पर पत्नी के डण्डे खा
ब्लॉग पर पुरुषवादी बनते
कर दें पतिदेव पिटाई भी
नारीवादी बनकर तनते

अपने बारे में कुछ लिख दो
यह आभासी दुनिया ठहरी
चिल्ला चिल्लाकर खूब कहो
समझो पब्लिक तो है बहरी

साइकिल की दुकान खोली हो
पर बोले रेल चलाते हैं
चाहे पान ही लगाते हों
कहते हथियार बनाते हैं

ये धंधा करें कमीशन का
पर बहुत बड़े व्यवसायी हैं
बूढ़ी अम्मा प्रोफाइल में
लिखती अपने को ताई हैं

लिख दिया कि हैं कलकत्ते में
पर ड्यूटी अपने साथ करें
हर पोस्ट सीरियस लिखते हैं
बच्चों से दो दो हाथ करें

अब कहें कहाँ तक आप कहो
बस अभी काम पर जाना है
खुद को मालिक की नज़रों में
अतिआवश्यक जतलाना है

बुधवार, सितंबर 15, 2010

मर्दों के लिए मर्द बहुतेरे

टाउनशिप में बंदर आया
उछला, कूदा वह लहराया

चढ़ा बालकोनी के ऊपर
जमा हो गए बच्चे भू पर

खीं खीं करके उन्हें डराया
कूद सड़क पर नीचे आया

सिर पर पैर रखे वे दौड़े
लाल हुए उन सबके म्हौंड़े

बंदर फूला नहीं समाया
अहंकार सा उसपर छाया

उसने टाउनशिप था जीता
सिद्ध हुआ हर योद्धा रीता

सबको दौड़ा दौड़ा मारा
सीना फूल हुआ गुब्बारा

उसने निज प्रतिभा पहचानी
विश्वविजय करने की ठानी

बढ़ा विजय मद में हो चूर
एक गाँव था थोड़ी दूर

सोचा इसको भी निपटा दूँ
इन बच्चों को भी दौड़ा लूँ

जैसे ही वह घुसा गाँव में
पीपल के पेड़ की छाँव में

खेल रहे थे बालक वीर
देख उसे हो उठे अधीर

भूल गये सब खेल निराले
दौड़ पड़े सब हो मतवाले

जिसके हाथ लगा जो लेकर
डण्डा, जूता, चप्पल, कंकड़

साथ हुए कुत्ते भी उनके
बंदर चला शोर यह सुनके

कभी पेड़ पर कभी गली में
दौड़ा कभी तेज फिर धीमे

फूली साँस उठा गिर गिरकर
जान बचाने को था तत्पर

सीना फूल हुआ गुब्बारा
उड़ा हवा में घमण्ड सारा

कितने पत्थर पड़े न जाने
गर्मी लगी शरीर तपाने

जैसे तैसे निकला बाहर
भागा ज्यों पीछे हो नाहर

चेहरे सब बच्चों के लाल
सबके किन्तु उठे थे भाल

घुसपैठिया गया था हार
इनको मिला विजय उपहार

बंदर का घमण्ड था गायब
"आज बचाया तूने या रब !"

पूर्ण हुए अरमान न मेरे
मर्दों  हेतु मर्द बहुतेरे

मंगलवार, सितंबर 14, 2010

हिन्दी-डे का सेलीब्रेशन

आज हिन्दी दिवस है । भाषा के बारे में मेरा व्यक्तिगत विचार है कि सारे संसार के लोग एक ही भाषा बोलें । अभी तक यह संभव नहीं हुआ है इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि भविष्य में भी यह संभव न होगा । पर यदि सारे संसार की एक ही भाषा होगी तो वह भाग्यशाली भाषा कौन सी होगी ? 

क्या हिन्दी वह भाषा हो सकती है ? या अंग्रेजी बाजी मार ले जाएगी या फिर किसी ऐसी नई भाषा का आविष्कार होगा  जिसको सीखना  सबके लिए बहुत आसान होगा । हो सकता है ऐसा कोई यन्त्र ईजाद हो जाए जिसे कानों पर लगाकर सामने वाला व्यक्ति चाहे जिस भाषा में बोले लेकिन उसका कहा हुआ हमें अपनी मातृभाषा में ही सुनाई देगा । फिर तो सब झंझट ही मिट जाएंगे ।
यह सब अभी बहुत दूर की बातें हैं । फिलहाल तो हमें अपने भारत को ही एक भाषा-भाषी बनाना है और इसके लिए हिन्दी से ही आशाएं हैं । हिन्दी का विस्तार हो । यह सभी सम्पर्क में आने वाली भाषाओं के शब्दों को ग्रहण करे । यह ऐसी नदी  हो जो जिसमें सभी धारायें आकर मिल जाएं ।

लेकिन अतिशुद्धतावादियों से डर लगता है । जो हिन्दी से अन्य भाषाओं के शब्दों को बीन बीनकर छाँटते रहते हैं जैसे चावल में से कंकड़ बीन रहे हों । हिन्दी को संस्कृत का पर्याय बना देना चाहते हैं ।

वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जो हिन्दी के नाम पर अंग्रेजी की टाँग तोड़ता दिखाई पड़ता है । देखिए:

सुनो जरूरी इनफॉर्मेशन
हिन्दी डे का सेलीब्रेशन

आज मनाएंगे ऑफिस में
इनक्ल्यूडेड डिनर है इसमें

आज बॉस का मूड ठीक है
हम सबका यह लकी वीक है

सब कुलीग को आना होगा
एक सोंग भी गाना होगा

होप, आप सब आ जाएंगे
पार्टी में बस छा जाएंगे

झूमेंगे सब डांस करेंगे
मिस न कभी यह चांस करेंगे

समझो इसको गेट-टुगेदर
ऊपर से अच्छा है वेदर

अच्छा, मैं चलती हूँ, बाय !
ओके, टेक केयर, एंजॉय ॥ 

रविवार, सितंबर 12, 2010

जनता के सेवक

इस कलयुग में जनसेवा का अवसर बड़े भाग्यवान लोगों को मिलता है । जनता के नखरे ही निराले हैं । नेता बेचारे सेवा का पुण्य पाने को तरसते रहते हैं । जनता देवी हैं कि किसी एक सेवक की सेवा से इनको संतुष्टि ही मिलती । माना कि एक सेवक से सेवा कराते कराते थोड़ी बोरियत होने लगती होगी । लेकिन कुछ तो सही गलत का विचार करना चाहिए । ऐसा भी क्या हुआ कि आप सबको एक ही साथ बुला भेजती हो । कम से कम पाँच पाँच साल तो एक सेवक को मौका मिलना चाहिए कि नहीं । लेकिन जनता देवी को तो सबकी सेवा चाहिए । शायद इन्हें खण्डित जनादेश देकर सब सेवकों को आपस में सेवा के लिए झगड़ते देखकर अपने पर गर्व करने में थोड़ी और आसानी होती होगी ।
बेचारे सेवक अभी चुनाव की थकान भी उतार पाते कि फिर से अपने प्रतिद्वन्दी सेवकों से लड़ना पड़ता है । ऐसे लड़ झगड़कर मान लो सेवा का आधिकार हासिल कर भी लिया तो क्या उतनी अच्छी तरह जनता देवी की सेवा कर पाएंगे जितनी फ्रेश मूड में होने पर कर पाते ।
चतुर व्यक्ति वही है जो दूसरों की गलतियों से ही सीख ले । ऐसे ही आजकल के जन सेवक हैं । इन्होंने अपने पूर्ववर्तियों को लड़ाई झगड़े के कारण नुकसान उठाते देखा है इसलिए ये उस गलती को दोहराना नहीं चाहते । मिल बैठकर सेवा अधिकार को बाँट लेते हैं । जनता देवी ठगी सी रह जाती है । और ये उसकी खूब सेवा कर जाते हैं ।

समझ नहीं आता इन्हें जनता के सेवक कहें या नाथ ?

चलते-चलते

अवसर फिर से लग गया, जनसेवा का हाथ
अनाथ जनता को इधर, नया मिल गया नाथ
नया मिल गया नाथ, भाग्य सोये जागे हैं
होन लगे शुभ शकुन, अपशकुन सब भागे हैं
विवेक सिंह यों कहें, बनी है बढ़िया जोड़ी
खड़े हुए हैं साथ आज फिर अन्धे-कोढ़ी

शनिवार, सितंबर 11, 2010

अलग है फुरसतिया की बात ( बड्डे वीक विशेष )














अलग है फुरसतिया की बात

इनके साथ हमेशा चलती
मौजों की बारात
अलग है फुरसतिया की बात

लिखते ब्लॉग जबरिया, लेकिन
ब्लॉगिंग है सूनी इनके बिन
ये न लिखें तो कटते गिन गिन
हफ्ते के दिन सात
अलग है फुरसतिया की बात

लम्बे लम्बे लेख छापते
उदासियों को जला तापते
इनको पा सामने काँपते
उलझन के हालात
अलग है फुरसतिया की बात

मित्रों की कर टाँग खिंचाई
खूब मित्रता सदा निभाई
हा हा ठी ठी से दिलवाई
खुशियों की सौगात
अलग है फुरसतिया की बात

कभी कभी झगड़े निपटाते
सूक्ति शायरी खूब सुनाते
कभी अचानक से कर जाते
दोहों की बरसात
अलग है फुरसतिया की बात

होंगे ये सैंतालिस साला
बड्डे है बस आने वाला
रूठे तो रूठे गोपाला
दिया सत्य का साथ
अलग है फुरसतिया की बात

ब्लॉगिंग में आदर्श हमारे
अनूप शुक्ल कानपुर बारे
जानें सभी बिलागर सारे
ज्ञात और अज्ञात
अलग है फुरसतिया की बात

मिलें कभी आमने सामने
अवसर कभी न दिया राम ने
कहा न हैप्पी बड्डे हमने
कभी मिलाकर हाथ
अलग है फुरसतिया की बात

इनके साथ हमेशा चलती
मौजों की बारात
अलग है फुरसतिया की बात

( पोस्ट उत्साह में समय से पहले छप गई थी । सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी जी ने ध्यान दिलाया तो हमने बड्डे वीक मनाने की सोच ली है )

शुक्रवार, सितंबर 10, 2010

ईमानदारी का प्रमाणपत्र

एक बार किसी राज्य में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया था । बात राजा के कानों तक पहुँची । राजा ने मंत्रियों से विचार विमर्श किया कि क्या कदम उठाया जाय । मंत्रियों ने सर्वसम्मति से सलाह दी कि एक आयोग बिठाया जाय जो यह पता लगाये कि भ्रष्टाचार अपनी जड़ें  कितनी गहरी जमा चुका है ? तदनुसार कदम उठाए जाएं ।

आयोग का गठन हो गया । रिपोर्ट भी आ गयी । रिपोर्ट थी कि राज्य में तीन में से दो व्यक्ति भ्रष्ट हैं और हर तीसरा व्यक्ति ईमानदार है ।  राजा को बड़ी चिन्ता हुई । उसने फिर से मंत्रियों को पूछा कि भ्रष्टाचार को कम करने के लिए क्या कदम उठाया जाय ? सलाह मिली कि चूँकि ईमानदार लोग अल्पसंख्यक हो गए हैं अत: उन्हें आरक्षण दे दिया जाय । तय हुआ कि ईमानदार लोगों को  जिला मुख्यालयों से ईमानदारी का प्रमाणपत्र लेना होगा । तभी वे आरक्षण के हकदार होंगे । राज्य भर में यह घोषणा करवा दी गयी ।

निर्धारित दिन  जिला  मुख्यालय पर बने बूथ के सामने सुबह से ही लम्बी लाइन लग गयी । प्रमाणपत्र देने वाले बाबू को पता था कि जाँच रिपोर्ट के अनुसार हर तीसरा आदमी ईमानदार है । उसने प्रमाणपत्र देना आरम्भ किया तो पहले दो व्यक्तियों को भगा दिया और तीसरे को ईमानदारी का प्रमाणपत्र थमा दिया । यही क्रम जारी रहा । जिन लोगों को भगाता वे फिर से लाइन में पीछे जाकर खड़े हो जाते । बड़ी भीड़ को बाबू ने शाम होने से पहले ही निपटा दिया । अन्त में केवल दो ही लोग बचे जिन्हें ईमान दारी का प्रमाणपत्र न मिल सका । बाबू उनसे बोला यार तुम्हें कहीं देखा है । मेरा परिचित तो भ्रष्ट नहीं हो सकता । इस तरह  उनको भी ईमानदारी का प्रमाणपत्र मिल गया । 

उस जिले को पूर्ण ईमानदार जिला होने की बधाई स्वयं राजा ने दी और उस बाबू को सबसे परिश्रमी बाबू होने का अवार्ड भी !

मित्रगण