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सोमवार, जनवरी 26, 2009

आज बधाई लेना इनका जन्म सिद्ध अधिकार है



सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर हार्दिक बधाइयाँ .

आज तो हमारे घर में त्योहार का माहौल है . ऐसा नहीं है कि हम ही सबसे बडे देशभक्त हैं . दरअसल आज घर के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य का जन्मदिन है . आप ठीक समझे यह जो चित्र में दिखाई दे रहा है यही वह महत्वपूर्ण सदस्य है . यह हमारा छोटा बेटा है . इसका नाम सनत कुमार सिंह है . पर इसे हम सब सन्तू ही कहते हैं . इसके नामकरण की भी कहानी है . इसके बडे भाई का नाम हमने अनन्त रख दिया, और उसका प्यार का छोटा नाम ठहरा अन्तू . जब इसका जन्म हुआ तो हमारे दादा जी (अब स्वर्गीय) ने इसका नाम अन्तू की तर्ज पर सन्तू रखने की घोषणा कर दी . अब हम क्या करते इसी के मिलान का बडा नाम खोजने में जुट गए और यह सनत कहलाया .

यह कैसे अपनी दादागीरी के बल पर घर का सबसे महत्वपूर्ण सदस्य हो गया . यह तो आगे कभी बताएगें पर अभी तो इसके हैप्पी बड्डे की तैयारी में जुटना है . जबसे इसे पता चला है कि हैप्पी बड्डे के दिन बड्डे बॉय अपने साथियों का राजा बन जाता है तभी से इसे बड्डे का इंतजार रहता है . कलेण्डर में छ्ब्बीस जनवरी को भी बडे भाई की मदद से याद कर लिया है कि मेरा बड्डे यह है . हमें भी जब तब याद दिलाता रहता है . " पापा देखो मेरा हैप्पी बड्डे !"

अच्छा यह तो बताया ही नहीं कि यह आज चार साल का हो गया . नर्सरी क्लास का अध्ययन जारी है . इसकी खास बात यह है कि इसे फर्स्ट के अलावा कहीं कुछ मंज़ूर नहीं . स्कूल रेस में तीसरे सथान पर रहा पर आज तक बाबा को फोन पर यही बताता है कि " बाबा जी ! मैं फर्स्ट आया हूँ !" और कभी भैया ने कह दिया कि तू फर्स्ट नहीं थर्ड था तो उसकी भी खैर नहीं . या तो खुद ही फैसला कर लेगा नहीं तो हम हैं ही . इसी पार्टी में हैं ना . कहना पडता है कि सन्तू फर्स्ट ही आया था !

कोष्ठक में : संयोग से आज गुरु जी शिवकुमार मिश्रा जी की शादी की सालगिरह भी है ! उन्हें बहुत बहुत मुबारकबाद !

मित्रगण