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रविवार, जनवरी 25, 2009

इण्टरव्यू ऑफ द रिकार्ड

चुक गए कैसे होकर मर्द ?
हुआ यह दिल में कैसा दर्द ?
लगा दिल पर कैसा आघात ?
क्या कोई अन्दर की है बात ?

इसे रखना ऑफ दा रिकार्ड ।
समय मेरा आया अब हार्ड ॥
मजे में बीते चारों साल ।
किंतु अब जाकर हुआ बवाल ॥
कहाँ मैं सीधा सा इन्सान ।
कहाँ यह कूटनीति बलवान ॥
कर दिया मुझको बाईपास ।
बने एनर्जी वाले खास ॥
यही होता है सबके साथ ।
किसी से मत कहना यह बात ॥
मुझे भी देकर अब आराम ।
चूसकर फेंक दिया ज्यों आम ॥
पार्टी आम आदमी ब्राण्ड ।
बजाती आमों का ही बैण्ड ॥
चलाती चूसो फेंको नीति ।
करो मत राजनीति से प्रीति ॥

कोष्ठक में: हमारे प्रिय ताऊ जी हमारे सबसे बडे पाठक साबित होते हुए हमारे ब्लॉग पर सबसे पहले टिप्पणियों की हाफ सेंच्युरी लगाने में सफल रहे हैं . बहुत बहुत बधाइयाँ !

मित्रगण