एक बार परीक्षा में गुरु शिष्य परम्परा पर निबंध लिखने को कहा गया । हमने एक उत्तर पुस्तिका से एक नमूना उठाकर यहाँ पेश किया है .
" भारत में गुरु शिष्य परम्परा बहुत पुरानी है । यहाँ पर गुरुओं का आदर किया जाता है . हम भी अपने मास्साब का बहुत आदर करते हैं . गुरु शिष्य परम्परा का महत्व निम्नलिखित है .
आपने महसूस किया होगा कि जब से संसद पर हमले के आरोपी अफजल को फाँसी की सजा सुनाई गई है तभी से यदा कदा उसकी सजा को क्रियान्वित करवाने के लिए जनता के बीच से आवाजें आती रही हैं . जब कभी कहीं बम धमाका हो जाता है तो कुछ समय के लिए यह शोर तेज होता है और फिर धीरे धीरे सब कुछ सामान्य हो जाता है ।
पर इतने पर भी हमारी सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंगती । आखिर जूँ रेंगेगी कैसे . उसे रेंगने ही नहीं दिया जाता . साफ सफाई पर ध्यान ही इतना दिया जाता है , कि बेचारी जूँ पास भी फटकने नहीं पाती , रेंगना तो बहुत दूर की बात है । हमारे पूर्व गृहमंत्री की सफाई के आगे तो अच्छे से अच्छे सफाईगीर भी पानी भरते हैं .
पर सब लोग सरकार को ही दोष दिए जाएंगे । किसी ने यह नहीं सोचा कि सरकार के ऊपर तो देश की परम्पराओं को जीवित रखने की भी जिम्मेदारी है . उस जिम्मेदारी को नहीं निबाह सकी तो आने वाली पीढियों को कैसे मुँह दिखाएगी ? यह जो अफजल के नाम के पीछे जो गुरु शब्द लगा हुआ है उसने सारा खेल बिगाडा हुआ है .
आप यह तो भली भाँति जानते होंगे कि गुरु शिष्य परम्परा इस देश में युगों से चली आरही है । गुरु के एक आदेश पर शिष्य अपनी जान तक देने के लिए तैयार हो जाते थे । एकलव्य ने कैसे गुरु के एक इशारे पर अपना अँगूठा काटकर उनको गुरु दक्षिणा में दे डाला था भूल गए आप ? बस यही प्रोब्लम है पब्लिक के साथ . पब्लिक जल्दी भूल जाती है ।
इस पर भी हमारे प्रधानमंत्री के लिए तो गुरु शब्द का और भी अधिक महत्व है . वैसे इस देश में ऐसा पहली बार नहीं है कि गुरु को मृत्यु दण्ड दिया गया हो । इससे पहले भी गुरु अर्जुनदेव को और गुरु तेगबहादुर को मुगलों ने मृत्यु दण्ड दिया था . और बाद में अंग्रेजों ने शिवराम राजगुरु को भगतसिंह के साथ फाँसी पर लटका दिया था । पर इससे क्या वे सब चाहे बेशक निर्दोष थे . पर शासकों को गुरु शिष्य परम्परा का इतना खयाल नहीं था जितना आज की सरकार को है ।
आशा है हमारी सरकार गुरु शिष्य परम्परा को जीवित रखने में कोई कसर न उठा रखेगी . और अफजल गुरु यूँ ही कबाब काटते रहेंगे . हम तो खैर अपने मास्साब का सम्मान करते ही हैं .
संभव है कि इस ब्लॉग पर लिखी बातें मेरी विचारधारा का प्रतिनिधित्व न करती हों । यहाँ लिखी बातें विभिन्न दृष्टिकोणों से सोचने का परिणाम हैं । कृपया किसी प्रकार का पूर्वाग्रह न रखें ।
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बुधवार, दिसंबर 17, 2008
गुरुवार, सितंबर 11, 2008
शिव कुमार मिश्रा गुरु हैं विवेक सिंह के ?
शिव कुमार मिश्रा हुए, गुरु हमारे आज ।
हम उनके चेले हुए, अब न रहा यह राज ।
अब न रहा यह राज,हों सूचित सर्व साधारण ।
गुरु चेले का यह संबंध न हुआ अकारण ।
विवेक सिंह यों कहें, जान लें ब्लॉगर सारे ।
शिव कुमार मिश्रा जी अब हैं गुरु हमारे ॥
कोष्ठक में:
आदरणीय श्री मिश्र जी से बिना गलती किए एडवांस में क्षमा माँग लेता हूँ कि उनको मैंने बिना परमीशन लिये ही अपना गुरु घोषित कर दिया है . और यह भी घोषणा करता हूँ कि फीस नहीं दूँगा . आशा है क्षमा मिलेगी वह भी कविता में .
हम उनके चेले हुए, अब न रहा यह राज ।
अब न रहा यह राज,हों सूचित सर्व साधारण ।
गुरु चेले का यह संबंध न हुआ अकारण ।
विवेक सिंह यों कहें, जान लें ब्लॉगर सारे ।
शिव कुमार मिश्रा जी अब हैं गुरु हमारे ॥
कोष्ठक में:
आदरणीय श्री मिश्र जी से बिना गलती किए एडवांस में क्षमा माँग लेता हूँ कि उनको मैंने बिना परमीशन लिये ही अपना गुरु घोषित कर दिया है . और यह भी घोषणा करता हूँ कि फीस नहीं दूँगा . आशा है क्षमा मिलेगी वह भी कविता में .
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