पहेली पूछना तो आसान था . बस फ़ोटो लगाया और सवाल पूछ लिया . पर जब लोगों के जवाब देखे तो हमारी एक सदस्यीय निर्णय कमेटी ने दाँतों तले उंगली दबा ली . विजेता का निर्णय करना तो बहुत कठिन हो गया . दर असल कुछ लोगों ने पहेली को सीरियसली लिया ही नहीं और कुछ ने ज्यादा सीरियसली ले लिया .
इस पहेली में हमने पूछा था कि ये महाशय कौन हैं ? और क्या कहना चाहते हैं . अधिकतर प्रतियोगियों ने पहेली के एक ही हिस्से का उत्तर दिया .
सबसे पहले हमारे मित्र कुश का जबाब आया और हिंट माँगने लगे . जब हमने साफ मना कर दिया तो उन्होंने अपनी समझ से ये बताने की कोशिश की कि यह कौन हैं पर क्या कहना चाहते हैं इस पर कुश कुछ न बोले .
मुसाफिर जाट ने शुरुआत कर दी पर जबाब बीच में छोड घूमने निकल गए . मुसाफिर जो हैं .
संजय बेंगाणी जी साफ मुकर गए .
सबसे बडा उलटफेर का शिकार पहेली विशेषज्ञ अल्पना वर्मा जी को होना पडा . भूमिका बनाने में ही उनका टाइम अप हो गया .
सीमा गुप्ता जी भीं हँसी में टाल गईं .
सुनीता शानू जी ने दोनों भागों के जबाब दिए . इनके दूसरे हिस्से को देखिए : " इनके हाथों की स्टाईल और आंखों के एक्सप्रेशन को गौर से देखिये लगता है यह कह रहे हैं...आतंकवाद? छड यार सानु की फ़र्क पैणा हैं असी तो बुलेट प्रुफ़ हैं होर असी ओथे जांदे ही नई जिथे बम होणा होया,फ़ेर जावांगे तो भी मोमबत्ती जलाण वास्ते...:) की कैया असी पहेली जीत गये लो जी तुसी भी बधाई कबूल करो दार जी ...:)"
आप देख सकते हैं इन्होंने स्माइली लगा दी मतलब हँसी में टाला .
हिमांशु जी ने पहेली को मजेदार बताया .
आदरणीय ज्ञानदत्त जी ने पूरी कॉपी एक ही हिस्से का जबाब देने में जाया कर दी . पर बी-कॉपी का कोई प्रोवीजन ही नहीं था .
मोहन वशिष्ठ जी ने दोनों भागों को कवर किया .
रंजन जी ने दर्द को समझा .
हमारे शेखावत जी ज्ञानदत्त जी की नकल मारते लगे :)
रंजना जी ने बडा ही संतुलित जबाब दिया . पर हाथों के स्टाइल से मैच नहीं मिला .
महक जी ने अंग्रजी में अपना आन्सर दिया .
अलग सा जी ने अलग सा ही कुछ कहा .
डी.के. शर्मा जी भी अपना स्टाइल मारकर चलते बने .
पिण्टू जी ने हमें मुना भाई बताया .
धीरू सिंह जी को लगा कि हम उनपर अलीगढी चक्कर चला रहे हैं .
महेन्द्र मिश्रा जी ने भी टाइम पास कर लिया .
चन्द्रमौलेश्वर जी ने पहचाना नहीं . फिर भी बता दिया .
ताऊ जी अपनी ताऊ गीरी में जबाब दे दिए .
प्यासा सजल जी ने पूरी तन्मयता से परीक्षा दी . शायद विकिपीडिया की मदद भी ले आये . दोनों भागों का जबाब भी दिया .
अनुपम अग्रवाल जी निर्णायकों को घूस देने की फिराक में थे :)
प्रदीप मानोरिया जी यहाँ भी कविता लिखने से बाज न आए .
श्रद्धा जी ने आत्मविश्वास की कमी से मौका गँवा दिया .
अरविन्द मिश्रा जी ने भी आखिर में अपनी अटेण्डेंस लगा दी .
अब हम आपको सही जबाब बता दें :
यह मनमोहन सिंह जी हैं . यह कहना चाहते हैं : " क्या बात कर रहे हो यार, मुझे कौन नहीं जानता ?"
पर्फैक्ट जबाब कोई न मिला . आप लोग खुद ही अपने जबाब मिला लें . किसका कितना सही है . कमेटी हार गई आप सब जीत गए . पहेली पूछने से तौबा :)
वैसे रोचकता में सुनीता शानू जी का पलडा भारी रहा .
