आजकल 'अमर उजाला' में एक समाचार अक्सर पढ़ने को मिल जाता है जिसमें सोने चाँदी के गहनों की सफ़ाई करने के बहाने कुछ लोग भोली-भाली महिलाओं को झाँसा देकर उनके जेवरात लेकर भागने में सफ़ल हो जाते हैं ।
मैं 2003 में हरियाणा के ही धारुहेड़ा ( रेवाड़ी ) में रहा करता था । उस समय से ही यदा कदा हरियाणा से ऐसे समाचार पढ़ने को मिलते रहते थे । अब पानीपत में हूँ । यहाँ भी पिछले कुछ दिनों से आसपास के क्षेत्रों के ऐसे समाचार पढ़ने को मिल रहे हैं ।
ऐसे मामलों में अक्सर दो लोग सोने चाँदी के जेवर साफ़ करने की आवाजें लगते हुए गलियों में घूमते हैं । भोली भाली महिलाएं इन्हें बुलाकर पूछताछ करती हैं तो ये लोग बड़े सस्ते में ही जेवर साफ़ करने को तैयार हो जाते हैं । जेवर मँगाकर उन्हें पानी में डाला जाता है और कुछ मसाला भी महिलाओं को दिखाकर पानी में यह कहकर डाला जाता है कि इससे आधे घण्टे में जेवर साफ़ हो जाएंगे । इस पानी को आग पर गरम होने के लिए रख दिया जाता है ।
महिलाएं यूँ तो अपनी समझ से होशियारी से काम लेती हैं और टकटकी लगाए पूरा ध्यान जेवरों पर रखती हैं लेकिन जब उनसे पीने के लिए पानी माँगा जाता है या किसी अन्य बहाने से उन्हें दूर भेजा जाता है तो वे सम्मोहित सी उनके कहे अनुसार कार्य कर देती हैं । बस इसी समय ये लोग जेवर पानी से निकालकर अपने पास रख लेते हैं और यह कहकर वहाँ से चले जाते हैं कि आधे घण्टे बाद जब पानी ठण्डा हो जाए तो जेवर निकाले जा सकते हैं । जेवर साफ़ मिलेंगे । और वाकई जेवर ये लोग साफ़ कर ले जाते हैं । इसके बाद पछतावे के सिवाय कुछ नहीं मिलता । थाने में रिपोर्ट लिखवाइये । इधर उधर भागते रहिए । फ़िर कुछ नहीं होता ।
इसका इलाज केवल जागरूकता है । पर आश्चर्य है कि इतने सालों से एक ही तरीके से यह हो रहा है और लोग अब तक जागरूक नहीं हो सके ? दरअसल ऐसे समाचार अखबारों में ही पढने को मिलते हैं और अखबारों की पहुँच इतनी नहीं है जितनी कि टीवी की । टीवी वाले ऐसे समाचार भला क्यों दिखाएंगे जिससे चैनल की TRP बढ़ने की कोई उम्मीद ही नहीं ।
आशा है लोगों में जागरूकता आएगी और ऐसे ठगी के मामले और ज्यादा न होंगे ।