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शनिवार, जनवरी 31, 2009

यह सब आप ही का किया धरा है

बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
लो जी आज हमारा शतक पूरा हो ही गया ! बडी खुशी हो रही है । मजे की बात यह है कि यह शतक फालतू पोस्ट लिख लिखकर ही पूरा हो गया । हमें कुछ काम की चीज आती ही नहीं तो क्या इतनी सी बात के लिए ब्लॉग लिखना छोड दें ?
आप लोगों के सहयोग के बिना यह संभव नहीं था कि हम ब्लॉगिंग में इतना टिक पाते । आप सबके प्यार के बिना कब के उखड गए होते । मेरे फीके ( कडवा कहना अच्छा नहीं लगता ) स्वभाव के बावजूद आप लोगों ने मुझे न सिर्फ झेला बल्कि प्रोत्साहित भी किया । इससे मुझे आश्चर्य मिश्रित हर्ष हुआ ।
ब्लॉगिंग में मैंने हमेशा अपना स्वाभाविक खेल खेलने का प्रयास किया है । शायद इसीलिए यहाँ भी निजी जिन्दगी जैसे अनुभव हो रहे हैं । गलतफहमियाँ हुईं । रूठना मनाना हुआ । कभी हम रूठे आपने मनाया । कभी आप रूठे हमने मनाया । बडों ने हडकाई भी की और प्यार भी बरसाया ।
यहाँ पर बहुत सारे लोगों से जान पहचान भी हुई । फोन पर बात हुई पर आमने सामने मिलने का अवसर अभी नहीं मिला । मुझे लगता है कि मिझे जो नए लोग मिलते हैं उन्हें मेरा स्वभाव कुछ अजीब लगता होगा । मगर समय बीतते बीतते मुझे हमेशा स्वीकार किया गया है । और अच्छे अच्छे मित्र भी मिले हैं । ऐसा ही ब्लॉगिंग में हुआ । यहाँ भी मुझे सब लोगों का आशातीत प्यार मिला ।
चिट्ठा चर्चा करने के लिए मिला आमंत्रण पाकर मैंने बहुत सम्मानित अनुभव किया ।
इस शतकीय पोस्ट में मैं जानबूझकर किसी व्यक्ति विशेष का उल्लेख करने से बचना चाहता हूँ । मैं कहना चाहता हूँ कि अब तक मैंने जाने अनजाने जिन महानुभावों की भावनाओं को आहत किया हो उनसे मैं बिना शर्त क्षमा माँगता हूँ । भविष्य में ऐसा न हो यह मेरा प्रयास रहेगा । कडवी बातों को हम भूलना चाहते हैं और आपसे भी भूलने का अनुरोध करते हैं ।


चलते-चलते :

भैया मोहे ताऊ बहुत हँसायौ !
धंधौ करियौ ठगी कौ ताऊ, लट्ठ ताई सौं खायौ ।
खूँटा गाढि दियौ चिट्ठा पै , भैंस संग लै आयौ ।
बनिया कूँ ठगिवे कूँ ताऊ गोटू यार बनायौ ।
सगरौ माल उडायौ गोटू हाथ कछू नहिं आयौ ।
एकबार चंदा पै पहुँचियौ ठेला जाइ लगायौ ।
तेरी सौं मेरी सुनि भैया ताऊ सबकूँ भायौ ।

मित्रगण