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रविवार, जनवरी 18, 2009

लो आज हो गई हडकाई !


हम भी दर्द लिखेंगे अब ,
लो अपना दिल भी टूट गया ।
हम झगडा किससे करते थे ,
पर यार कौन सा रूठ गया ॥

लो आज हो गई हडकाई ,
अब खुश हो लें जलने वाले ,
ढल गए वक्त के साथ सभी ,
पर हम न हुए ढलने वाले ॥

क्या जबरदस्त हडकाई थी ,
सब रोम रोम हिल गया आज ।
शायद अब याद रहे आगे ,
क्या खूब सबक मिल गया आज ॥

इस कम्प्यूटर की भाषा में ,
भावना नहीं लिख पाते हम ।
लिखना तो खुशी चाहते हैं ,
पर लिख जाता है गम ही गम ॥

सबने विवेक से काम लिया ,
पर हम किससे लें काम कहो ।
दिल ने तो कहा रखो संयम ,
बेकार भावना में न बहो ॥

मित्रगण